तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर आंध्र में राजनीतिक संकट (राउंडअप इंट्रो-1)

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तेलंगाना मुद्दे पर चर्चा के लिए गुरुवार देर रात अपने 10 जनपथ स्थित आवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक की।

सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि इस उच्चस्तरीय बैठक में कैबिनेट मंत्रियों प्रणब मुखर्जी, ए.के.एंटनी, पी. चिदंबरम और एम. वीरप्पा मोइली के साथ ही सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल शामिल थे।

सूत्रों के अनुसार बैठक में तेलंगाना मसले पर ताजा गतिविधियों की समीक्षा की गई। इसमें आंध्र प्रदेश के सांसदों और विधायकों के इस्तीफे पर भी चर्चा की गई। बैठक में फैसला हुआ कि मोइली इन सांसदों से मिलेंगे और हाईकमान के विचारों से उन्हें अवगत कराएंगे।

इससे पहले अलग तेलंगाना राज्य के गठन की केंद्र सरकार की घोषणा से उपजी स्थिति पर आंध्र प्रदेश से लोकसभा और राज्यसभा के 21 कांग्रेस सदस्यों ने सोनिया गांधी से 10, जनपथ स्थित उनके निवास पर मुलाकात की।

सांसद के.एस.राव ने आईएएनएस को बताया कि पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि किसी के साथ कोई अन्याय नहीं होगा।

उन्होंने कहा, "उन्होंने कहा कि विधानसभा में अलग तेलंगाना राज्य की मांग के लिए एक प्रस्ताव तैयार करने से पहले रायलसीमा और आंध्र इलाके के सभी कांग्रेस विधायकों और सांसदों के विचारों को देखा जाएगा।"

रायलसीमा क्षेत्र के नेताओं ने कहा कि वे तेलंगाना के निर्माण के लिए राज्य के बंटवारे पर तभी राजी होंगे जब ग्रेटर रायलसीमा की मांग पूरी की जाएगी। इस तरह अगर देखा जाए तो आंध्र प्रदेश के तीन टुकड़े हो जाएंगे-तेलंगाना, ग्रेटर रायलसीमा और आंध्र।

राज्य में गुरुवार को एक ओर जहां तेलंगाना इलाके में खुशी का माहौल देखा गया वहीं रायलसीमा क्षेत्रों के कई विधायक और सांसदों ने केंद्र के फैसले के विरोध में इस्तीफा दे दिया।

बुधवार को देर रात केंद्र सरकार द्वारा लिए इस फैसले के विरोध में आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के कम से कम से 92 विधायकों और कई सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है।

विधानसभा अध्यक्ष किरण कुमार रेड्डी ने संवाददाताओं को बताया कि रायलसीमा और आंध्र क्षेत्र के 93 विधायकों ने इस्तीफे दे दिए। ये विधायक तीन पार्टियों के हैं।

सत्ताधारी कांग्रेस के 53, मुख्य विपक्षी दल तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के 29 और प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) के 11 विधायकों ने अपना-अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिया है।

अध्यक्ष ने कहा कि कुछ विधायकों ने उनको व्यक्तिगत रूप से और कुछ ने फैक्स के जरिए इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि विधायकों से व्यक्तिगत रूप से मिलने के बाद ही वह इस्तीफों पर फैसला लेंगे।

कांग्रेस और तेदेपा के 36 विधान परिषद सदस्यों ने भी इस्तीफा दे दिया है।

विरोधी तेवर अख्तियार करने वाले इन विधायकों और सांसदों ने सरकार के इस 'एकपक्षीय' निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन करने की भी धमकी दी।

विजयवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद एल. राजगोपाल इस्तीफा देने वालों में सबसे आगे रहे। पार्टी के एक अन्य सांसद आर. संभासिवा राव ने भी इस्तीफा दे दिया है। दो अन्य सांसदों ने भी इस्तीफे की पेशकश की है लेकिन इसकी पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार शाम नई दिल्ली में आंध्र प्रदेश के आंध्र और रायलसीमा इलाके के पार्टी के सभी सांसदों की एक आपात बैठक बुलाई है।

पूर्व मंत्री और कांग्रेस के विधायक जे. सी. दिवाकर रेड्डी सबसे पहले इस्तीफा देने वाले विधायकों में शामिल रहे। विधानसभा अध्यक्ष किरण कुमार रेड्डी को भेजे अपने इस्तीफे में रेड्डी ने कहा कि राज्य के बंटवारे के विरोध में वह विधानसभा से इस्तीफा दे रहे हैं।

आंध्र इलाके से आने वाले मुख्यमंत्री के. रोसैया ने इस्तीफों की पुष्टि की लेकिन उनकी संख्या नहीं बताई। दूसरी ओर तेदेपा अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू और पीआरपी प्रमुख के.चिरंजीवी ने अपने विधायकों की आपात बैठक बुलाई है।

इस बीच विपक्षी दलों के अलावा कांग्रेस सांसदों और विधायकों के इस्तीफे को देखते हुए मुख्यमंत्री के. रोसैया ने भी इस मामले में जल्दबाजी न करने का संकेत दिया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि तेलंगाना के गठन का प्रस्ताव विचार विमर्श के बाद ही विधानसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने सांसदों और विधायकों को आक्रोशित न होने और इस्तीफा न देने की सलाह देते हुए कहा कि प्रस्ताव पेश करने की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं की गई है।

उन्होंने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इसका अर्थ यह नहीं है कि यह फौरन पेश कर दिया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया के कई चरण हैं। हमें अन्य क्षेत्रों की जनता से भी बात करनी होगी।"

विरोधी तेवर अख्तियार करने वाले इन विधायकों और सांसदों ने केंद्र सरकार के इस 'एकपक्षीय' निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी।

इधर, संसद में भी तेलंगाना के गठन का मुद्दा छाया रहा। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा में कहा कि नए तेलंगाना राज्य के गठन के बारे में केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश सरकार से जानकारी का इंतजार कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय देर रात लिया गया और अभी तक राज्य से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी की सरकार से बयान देने की मांग के जवाब में मुखर्जी ने कहा, "इस समय हम कोई बयान नहीं दे सकते।" उन्होंने कहा कि सरकार तेलंगाना के गठन को लेकर उठाए गए कदमों के बारे में एक या दो दिन में सदन को जानकारी उपलब्ध करा देगी।

राज्यसभा में तेलंगाना मुद्दे पर दो बार हंगामा हुआ। संसद का सत्र जारी होने के बावजूद तेलंगाना के गठन के बारे में सदन के बाहर सार्वजनिक घोषणा करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया।

चिदंबरम ने कहा कि पृथक तेलंगाना राज्य की मांग के मसले पर सरकार के पास संसद के बाहर बयान देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। इसके बाद ही सदन में शांति कायम हो सकी।

चिंदबरम ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा, "भाजपा ने जब बुधवार को इस मसले को सदन में उठाया तो सरकार उत्तर देने की स्थिति में नहीं थी क्योंकि इस पर मंत्रणा चल रही थी। मंत्रणा देर रात तक पूरी हुई और हम इस पर बयान देने में विलंब नहीं कर सकते थे।"

उल्लेखनीय है कि प्रस्तावित तेलंगाना में आंध्र प्रदेश के 10 जिले शामिल करने की मांग है। इस तरह बंटवारे की स्थिति में आंध्र प्रदेश में 13 जिले रह जाएंगे, जिसमें 9 जिसे तटीय आंध्र के और चार जिले पिछड़े रायलसीमा क्षेत्र के होंगे। तेलंगाना की जनसंख्या 3.5 करोड़ है जबकि तटीय आंध्र और रायलसीमा की आबादी चार करोड़ रह जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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