मंडेला, टेरेसा जैसा नहीं हूं मैं: ओबामा

ओबामा जब गुरुवार को ओस्लो में वर्ष 2009 के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार ग्रहण करेंगे तो अपने हीरो महात्मा गांधी को तो उद्धृत करेंगे ही, पर उनका ज्यादा जोर उन आलोचकों को संतुष्ट करने पर होगा जो मानते हैं कि पुरस्कार के लिए उनका चयन अंतर्विरोध से भरा है।
कई लोग अफगानिस्तान में 30 हजार सैनिकों की तैनाती के ओबामा के निर्णय को नोबेल शांति पुरस्कार की भावना के खिलाफ मान रहे हैं। ह्वाइट हाउस के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स ने यहां संवाददाताओं से कहा, "राष्ट्रपति ओबामा इस धारणा को दूर करने की कोशिश करेंगे कि अफगानिस्तान में 30 हजार सैनिकों की तैनाती के उनके निर्णय और नोबेल पुरस्कार की भावना के बीच अंतर्विरोध है।"
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति इससे अच्छी तरह अवगत हैं कि वह मंडेला या मदर टेरेसा की श्रेणी में नहीं हैं। पुरस्कार ग्रहण करते वक्त वह अपनी यह राय जरूर जाहिर करेंगे।"
यह पूछे जाने पर कि क्या ओबामा अफगानिस्तान में सैनिकों की तैनाती के अपने फैसले के कारण यह पुरस्कार हासिल करते हुए वैचारिक उलझन महसूस करेंगे तो उन्होंने कहा, "मैं समझता हूं कि राष्ट्रपति ने शांति की बहाली के लिए जो कदम उठाए हैं, उन पर उन्हें गर्व है। इन कदमों से दुनिया में शांति और स्थिरता कायम होगी।"
यह पूछे जाने पर कि क्या खुद को गांधी का अनुयायी कहने वाले ओबामा इस पुरस्कार को अपने विचार और कार्यशैली के अनुरूप मानते हैं तो उन्होंने कहा, "इसे लेकर वह किसी अंतर्विरोध के शिकार नहीं हैं। निश्चित तौर वह इस मौके पर गांधी जैसी ऐसी हस्तियों को उद्धृत करेंगे जो इस धरती पर उनसे पहले आए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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