उल्फा नेताओं के लिए बैठक स्थल बनी गुवाहाटी की जेल
गुवाहाटी, 9 दिसम्बर (आईएएनएस)। गुवाहाटी की सेंट्रल जेल प्रतिबंधित संगठन युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के नेताओं लिए एक बैठक स्थल बन चुकी है जहां ये लोग शांति प्रक्रिया के संदर्भ में गहन विचार कर रहे हैं।
उल्फा के उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई, स्वयंभू विदेश सचिव साशा चौधरी, स्वयंभू वित्त सचिव चित्रबन हजारिका और इस संगठन के प्रचार विभाग का प्रमुख मिथिंगा दैमेरी विगत दो दिनों से बैठक में मशूगल हैं।
गोगोई और दैमेरी पहले से ही गुवाहाटी की इस जेल में बंद हैं। दूसरी ओर चौधरी और हजारिका को बांग्लादेश के प्रशासन ने पिछले महीने भारत के हवाले किया था और इन दोनों को बीते सोमवार एक स्थानीय अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
चौधरी और हजारिका के वकील बिजोन महाजन ने आईएएनएस से कहा, "जांच एजेंसियां सोमवार को दोनों के लिए 30 और दिनों की पुलिस हिरासत मांग सकती थीं। परंतु उन्होंने पुलिस हिरासत के लिए कोई दबाव नहीं डाला। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार चाहती थी कि ये दोनों जेल में बंद अपने साथियों से मिलें।"
गोगोई को वर्ष 1998 में गिरफ्तार किया गया था जबकि दैमेरी को भूटानी सेना ने वर्ष 2003 में पकड़कर भारत को सौंप दिया था।
महाजन ने कहा, "यह सकारात्मक कदम है कि चारों उल्फा नेता शांति वार्ता पर अपनी राय बांट रहे हैं और मेरा कहना है कि यह एक अच्छी शुरुआत है एवं उन्हें जेल में रहने देने की सरकार की अच्छी रणनीति है।"
जेल अधिकारियों का कहना है कि चारों उल्फा नेताओं को एक ही सेल में रखा गया है कि ताकि राज्य में शांति के बारे में विचारों का आदान-प्रदान कर सकें।
सुरक्षा और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार जल्द ही उल्फा के अध्यक्ष अरविंद राजखोवा से भी पूछताछ खत्म करना चाहेगी और फिर उल्फा के प्रमुख परेश बरुआ को अलग रखते हुए शांति वार्ता शुरू करने के बारे में काम करेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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