अति कमजोर देशों ने शिखर सम्मेलन अवरुद्ध किया (लीड-3)
कोपेनहेगन, 9 दिसम्बर (आईएएनएस)। द्वीपीय देश टुवालू के नेतृत्व में विकासशील देशों के एक समूह ने जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगन में हो रहे शिखर सम्मेलन से बुधवार को बहिर्गमन किया, जिसके कारण कुछ घंटों के लिए सम्मेलन की कार्यवाही रोक देनी पड़ी।
टुवालू और अन्य छोटे द्वीपीय देश जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहे समुद्र के जलस्तर के कारण सबसे ज्यादा खतरे में हैं। ये देश कोपेनहेगन के बाहर इससे भी एक अति मजबूत समझौता चाहते हैं।
सुबह के सत्र के प्रारंभ में अध्यक्ष ने जब इस संदर्भ में टुवालू के प्रस्ताव पर विचार नहीं किया तो इस देश के प्रतिनिधियों ने कुछ अन्य विकासशील देशों के साथ सम्मेलन से बहिर्गमन किया। इस कारण इस सत्र की कार्यवाही अवरुद्ध हो गई।
इस घटना के बाद अनौपचारिक रूप से हुई बातचीत में तय किया गया कि सम्मेलन अपराह्न् में फिर शुरू होगा।
गैर सरकारी संगठन ग्रीनपीस के अंतर्राष्ट्रीय जलवायु नीति निदेशक मार्टिन कैसर ने कहा, "कोपेनहेगन के एक सबसे महत्वपूर्ण सवाल से संदेह दूर हो गया है। वह सवाल यह है कि क्या इस सम्मेलन का निष्कर्ष वैधानिक रूप से बाध्य होगा।"
सम्मेलन से बहिर्गमन की यह घटना विकासशील देशों की इस हताशा का अति नाटकीय प्रदर्शन था कि धनी देश अपने यहां ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में पर्याप्त कटौती करने के प्रति अनिच्छुक हैं। इसके साथ ही वे गरीब देशों को ग्लोबल वार्मिग के प्रभाव से निपटने के लिए पर्याप्त धन मुहैया नहीं कराना चाहते।
जलवायु परिवर्तन के मुकाबले के लिए एक वैश्विक संधि के रास्ते में लगातार मतभेद बने हुए हैं।
यहां सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जमा हुए लगभग सभी 192 देश अब इस बात पर सहमत हो गए हैं कि सम्मेलन के अंत में वैधानिक रूप से बाध्य कोई समझौता मूर्त रूप नहीं ले पाएगा। इसके बदले संभावना का एक राजनीतिक घोषणा पत्र सामने होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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