हर शनिवार को हक की लड़ाई का नारा बुलंद करते हैं गैस पीड़ित
भोपाल, 30 नवंबर (आईएएनएस)। भोपाल गैस त्रासदी से मिले जख्म 25 साल बाद भी हरे हैं, मगर इन जख्मों ने उन्हें तोड़ा नहीं बल्कि उन्हें आपस में जोड़ने का काम किया है। यही वजह है कि वे पिछले 24 सालों से हर शनिवार को न केवल भोपाल के ऐतिहासिक शाहजहांनी पार्क में जमा होते हैं, बल्कि हक की लड़ाई को और तेज करने की कसम खाते हैं।
गैस पीड़ितों का पिछले 24 सालों से अपने हक की लड़ाई का अभियान जारी है। वे छले गए हैं मगर हारे नहीं हैं, हर शनिवार को शाहजहांनी पार्क में जमा होने वाले अपनी लड़ाई को तब तक जारी रखने को तैयार हैं जब तक उन्हें हक मिल नहीं जाता। 24 सालों में पड़े 1224 शनिवार को पीड़ितों ने एकजुट होकर उस संकल्प 'हक लेकर रहेंगे हारेंगे नहीं' को पूरा किया है, जिसे उन्होंने पहले दिन लिया था।
राजेंद्र नगर में रहने वाली 85 वर्षीय हल्की बाई की आंखें 2-3 दिसंबर 1984 की रात को याद कर छलक पड़ती हैं। उनकी आंखें कमजोर पड़ गई हैं और काया को बीमारी ने घेर लिया है। वे यूनियन कार्बाइड से रिसी गैस के दर्द को 25 सालों बाद आज भी महसूस करती हैं। 25 सालों में उन्हें महज कुछ हजार रुपये ही मिले जो उनकी बीमारी की दवा के लिए भी नाकाफी हैं।
इतना कुछ होने के बाद भी हल्की बाई ने हक की लड़ाई का रास्ता नहीं छोड़ा है। वे पिछले 24 सालों से नियमित रूप से शाहजहांनी पार्क में हर शनिवार को पहुंचती हैं, जहां भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन की अगुआई में संर्घष के रास्ते पर निरंतर चलने का एक स्वर में नारा बुलंद किया जाता है।
सिर्फ हल्की बाई ही नहीं, सैकड़ों ऐसे लोग हैं, जिन्होंने हक की लड़ाई को 24 सालों से जारी रखा है, इस उम्मीद के साथ कि कभी तो सुबह होगी। वे कहती हैं कि नेता, सरकारें और अफसर भले ही दाउ केमिकल्स से समझौता कर लें, मगर जीत उनकी ही होगी।
हमीदा बी ने गैस त्रासदी में अपने 20 से अधिक रिश्तेदारों को खोया है। वे कहती हैं कि शाहजहांनी पार्क में उन्हें आकर लगता है कि वे अकेली नहीं है और भी कई ऐसे लोग हैं, जिनके दर्द उनसे कम नहीं हैं। इतना ही नहीं यहां आकर उन्हें अपनी लड़ाई को जारी रखने का हौसला मिलता है।
भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार कहते हैं कि गैस पीड़ित अब तक कई सफलताएं पा चुके हैं मगर ये नाकाफी हैं, इसलिए संघर्ष का क्रम अभी थमा नहीं है। वे आगे कहते हैं कि गैस पीड़ित शाहजहांनी पार्क में सिर्फ अपनी बात नहीं करते हैं बल्कि महंगाई, बिगड़ंी कानून व्यवस्था सहित अन्य ज्वलंत विषयों पर भी चर्चा होती है। इतना ही नहीं गैस पीड़ितों ने नर्मदा आंदोलन सहित अन्य आंदोलनों का भी साथ दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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