मुंबई हमलों की बरसी पर श्रद्धांजलि सभाएँ

पिछले साल 26 नवंबर को मुंबई में हुए हमलों की पहली बरसी पर कई श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित की गई. पिछले साल मुंबई के कई अहम ठिकानों पर हुए हमलों में 174 लोग मारे गए थे, जिनमें नौ हमलावर भी शामिल थे. हमलावरों ने छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, लियोपोल्ड कैफ़े, ओबेरॉय होटल, ताजमहल होटल और नरीमन हाउस को अपना निशाना बनाया गया था.

गुरुवार को इन हमलों की पहली बरसी पर देशभर में श्रद्घांजलि सभाओं का आयोजन हुआ. देर रात मुंबई और दिल्ली समेत कई जगहों पर लोगों ने मोमबत्ती जलाकर मारे गए लोगों को याद किया. केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने भी मुंबई का दौरा किया और लोगों को बचाने में अपना जीवन गँवाने वाले लोगों की याद में एक स्मारक का उदघाटन किया.

प्रार्थना सभा

गुरुवार को संसद की कार्यवाही शुरू हुई तो सांसदों ने दो मिनट का मौन रख कर मृतकों को श्रद्धांजलि दी. मुंबई में 26/11 की घटना के केंद्र में रहे ताज होटल में श्रद्धांजलि देने के लिए भारी संख्या में लोग पहुँचे. यहाँ सभी धर्मों के लोगों ने मिल कर मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.

नरीमन हाउस में यहूदी समुदाय के लोग जुटे और प्रर्थना सभा हुई. इस मौके पर भारतीय विदेश राज्य मंत्री शशि थरुर और भारत में इसराइली राजदूत भी आए. नरीमन हाउस पर हुए हमले में छह यहूदी मारे गए थे. मुंबई में गेटवे ऑफ़ इंडिया पर भारी संख्या में लोग जमा हुए. वहां मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है, "बड़ी संख्या में लोग मोबाइल से फोटो ले रहे थे. कहीं किताबें बिक रही थीं तो कहीं कुछ युवक चरमपंथ के ख़िलाफ़ मुक़ाबले की प्रतिज्ञा ले रहे थे."

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और आज़ाद मैदान पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया तो स्कूल के बहुत से बच्चे झंडे लेकर ओबरॉय होटल पहुँचे और श्रद्धांजलि अर्पित की. मुंबई में मरीन ड्राइव से सुरक्षाकर्मियों की विभिन्न टुकड़ियों ने परेड निकाली. शहर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई और चप्पे-चप्पे पर पुलिस नज़र आ रही थी.

मरीन ड्राइव पर परेड के दौरान पुलिस बैंड के साथ परेड कर रही पुलिस की टीमों में आतंकवाद निरोधक दल - फ़ोर्स वन, क्विक रिस्पांस टीम और सामान्य पुलिस के दस्ते, बख़्तरबंद गाड़ियों के साथ शामिल हुए. शहर में सुबह सैर करने वाले लोगों के साथ अनेक अन्य लोग गुरुवार को सड़के दोनों और परेड को देखने के लिए एकत्र हुए. ऑबराय होटल के बाहर अनेक लोग एकत्र हुए और उन्होंने मृतकों की याद में मोमबत्तियाँ लगाई.

मिले-जुले भाव

इस घटना के एक साल बाद मुंबई के लोगों में ग़ुस्सा, नाराज़गी और दुख के मिले-जुले भाव हैं. कुछ लोगों के मन में रोष भी है और वो चाहते हैं कि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों. मुंबई के स्थानीय लोग और बाहर से यहाँ आए लोगों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बढ़ी है लेकिन अनेक लोग मानते हैं कि अभी भी बहुत कुछ करने की ज़रुरत है.

ताज होटल के पास पंजाब से आए कुलबीर सिंह का कहना था कि उन्हें सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं लगती है. यही बात कई और लोगों ने भी कही है. हालांकि अन्य स्थानों पर लोगों का कहना था कि पुलिस की व्यवस्था पहले की तुलना में बहुत बेहतर हुई है. छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर मौजूद योगेश का कहना था कि उन्हें पुलिस पर पूरा भरोसा है कि वो कोई भी हमला रोक सकती है. लेकिन पाकिस्तान के साथ रिश्तों की बात आते ही ज़्यादातर लोग नाराज़ दिखते हैं.

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