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बुश ने किया भारत के दावे का समर्थन

George W Bush
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सदस्यता के लिए भारत के दावे का समर्थन किया है लेकिन कहा कि वैश्विक राजनीति के चलते यह प्रक्रिया आसान नहीं है।

शनिवार को यहां 'हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट' में बुश ने कहा, "हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए एक सीट की संभावना को जरूर देखना चाहिए।"

बुश ने कहा कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत के दावे का वह समर्थन करते हैं लेकिन वैश्विक राजनीति में बदलाव के चलते यह आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां तक भारत का मामला है उसे परिषद की प्रकृति में बदलाव के अनुसार देखना चाहिए।

बुश ने कहा, "क्या सुरक्षा परिषद को बदलना चाहिए? क्षेत्रीय चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए?क्या विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जापान को वहां जाना चाहिए? सुरक्षा परिषद को कितना बड़ा होना चाहिए? ये सभी जटिल सवाल हैं।"

एक सवाल के जवाब में बुश ने कहा, "जब हम इन सवालों का जवाब निकाल लेंगे तब भारत के मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। हम भारत को वहां देखना चाहते हैं।"

बुश ने कहा, "भारत एक मजबूत लोकतांत्रिक देश है। भारत सहिष्णु, शांतिपूर्ण और विभिन्न धर्मो वाला लोकतंत्र है। जलवायु परिवर्तन, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती जैसे क्षेत्र में भारत की भूमिका नेतृत्व करने वाले देश की है।"

भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि यह समझौता विश्व के लिए भारत का पासपोर्ट है। बुश ने कहा कि इससे बिना प्रदूषण फैलाए भारत को ऊर्जा उत्पादन का अवसर मिलेगा। बुश ने कहा, "(समझौते पर हस्ताक्षर करके) अमेरिका ने भारतीय परमाणु हथियार कार्यक्रम को मान्यता दी। दुनिया के लिए यह भारत का पासपोर्ट है।"

बुश ने पिछले वर्ष मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना भारत के लिए 'आंखें खोल देने वाली' थी।

राष्ट्रपति पद से हटने के बाद पहली बार भारत आए बुश ने कहा कि दोनों देशों के लिए आतंकवाद के खिलाफ जंग समान है। उन्होंने कहा, "दोनों देश कट्टरपंथियों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। कट्टरपंथी हमारी जिंदगी, हमारी दृष्टि, मानवाधिकारों से घृणा करते हैं।

हमें अपने खुफिया विभागों का प्रयोग कर उनके नेटवर्क को तोड़ना चाहिए।" बुश ने कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए सबसे अच्छा तरीका न्याय और स्वतंत्रता के मूल्यों को बढ़ावा देना है।

बुश ने कहा कि पद से हटने के बाद उनके जीवन में भले ही बदलाव हो गया है लेकिन भारत के प्रति उनका सम्मान नहीं बदला है। बुश ने कहा, "मैं एक उम्रदराज अवकाश प्राप्त आदमी हूं, इसलिए आपके साथ अपने विचार साझा करने के अवसर की सराहना करता हूं।"

राष्ट्रपति पद से हटने के बाद के दिनों के बारे में, श्रोताओं की हंसी के बीच उन्होंने कहा, "मैंने लारा को खाना बनाने की सलाह दी, उन्होंने मुझे बर्तन धोने को कहा।" बुश ने कहा, "जीवन बदल गया है लेकिन कुछ चीजें नहीं बदलीं.जैसे भारत के प्रति मेरा सम्मान।"

दोनों लोकतांत्रिक देशों के लोगों में समानताओं के बारे में बुश ने कहा, "हमारे देश अपने हितों, अपने मूल्यों के माध्यम से एकजुट हैं..हम आपके सशक्त और मुक्त प्रेस की विशेष सराहना के सहभागी हैं।"

बुश ने कहा कि अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए भारत और अमेरिका को मिलकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से अमेरिकी मित्रता और उसे सहायता भारत के हित में है।

बुश ने कहा, "अफगानिस्तान में युद्ध जीतने के लिए भारत और अमेरिका को मिलकर काम करना चाहिए। अगर तालिबान और अलकायदा को अफगानिस्तान पर कब्जा करने दिया जाएगा तो वे फिर वहां अपनी सुरक्षित पनाहगार बना लेंगे।"

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने भारत को एक आधुनिक और जीवंत राष्ट्र करार दिया। उन्होंने कहा, "मैं आपके प्रधानमंत्री को बहुत पसंद करता हूं। उन्हें अपना मित्र कहने पर मुझे गर्व है।"

बुश ने अपने कार्यकाल के दौरान हुए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते का हवाला देते हुए कहा कि वाशिंगटन ने भारत के परमाणु शस्त्र कार्यक्रम को मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व को वैश्विक वित्तीय संकट से उबरने में मदद दे रहा है।

बुश का कहना है कि बराक ओबामा का निर्वाचन अमेरिकी लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर था। बुश ने कहा, "ओबामा का निर्वाचन हमारे लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर था।. ओबामा मेरी पहली पसंद नहीं थे, लेकिन मैं उनकी हर सफलता की कामना करता हूं।"

मुस्लिम जगत में अमेरिका के खिलाफ कटुता बढ़ाने वाले इराक युद्ध का बचाव करते हुए बुश ने कहा कि "सद्दाम हुसैन के बगैर दुनिया अधिक बेहतर है।" उन्होंने मुस्लिमों से आतंकवादियों को अपने धर्म का दुरुपयोग करने की छूट नहीं देने का आग्रह किया।

बुश ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, "सद्दाम हुसैन के बगैर दुनिया अधिक बेहतर है। इस बारे में कोई संदेह नहीं है। सद्दाम अमेरिका के लिए एक खतरा था।"

बुश से पूछा गया था कि व्यापक संहार की क्षमता वाले हथियारों को छुपाकर रखने के आरोप में इराक पर वर्ष 2003 में हमला करने के निर्णय पर उन्हें कोई पछतावा है या नहीं।

बुश ने कहा, "कृपया आतंकवादियों को लोगों को यह कहने की अनुमति मत दीजिए कि जार्ज बुश और अमेरिका आपसे घृणा करते हैं। निर्दोष लोगों की हत्या करने के लिए एक महान धर्म का दुरुपयोग करने वालों से मैं घृणा करता हूं।"

बुश ने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि एक दिन पूरा मध्य पूर्व अमेरिका का मित्र बन जाएगा। बुश ने कहा कि दुनिया में दूसरी सबसे विशाल मुस्लिम जनसंख्या होने के बावजूद कोई भी एक भारतीय मुस्लिम अल कायदा में शामिल नहीं हुआ।

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