कोई समझौता नहीं करेंगे करजाई

अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर के पहले हामिद करज़ई ने अपने प्रतिद्वंद्वी के साथ सत्ता के बंटवारे के लिए किसी समझौते से इनकार किया है.
वहाँ दो हफ़्तों बाद दूसरे दौर का मतदान होना है लेकिन कहा जा रहा है कि दूसरे दौर के मतदान की चुनौतियों को देखते हुए कुछ अमरीकी अधिकारी सत्ता में बंटवारे के पक्षधर हैं. लेकिन दोनों उम्मीदवारों ने अमरीकी मीडिया से कहा है कि वे चुनाव के पक्षधर हैं.
बीबीसी के काबुल संवाददाता का कहना है कि बहुत से अफ़ग़ान नागरिकों को लगता है कि समझौता ठीक होगा क्योंकि एक तो सर्दियों के दिन आ रहे हैं और दूसरे तालेबान ने दूसरे दौर के मतदान में भी बाधा पहुँचाने की बात कही है.
हामिद करज़ई, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय दबाव में दूसरे दौर के चुनाव के लिए हामी भरी है, ने कहा, "इस तरह का कोई भी समझौता लोकतंत्र का अपमान होगा."
उन्होंने टेलीविज़न चैनल सीएनएन से हुई एक बातचीत में रविवार को कहा कि उन्होंने सभी अंतरराष्ट्रीय पक्षों से सहमति के बाद ही दूसरे दौर के चुनाव के लिए हामी भरी है, इसलिए चुनाव तो होने ही चाहिए.
दूसरी ओर पूर्व विदेश मंत्री और राष्ट्रपति चुनाव में हामिद करज़ई के प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने फ़ॉक्स न्यूज़ से किसी भी समझौते से इनकार करते हुए कहा है कि वे दूसरे दौर के चुनाव के लिए तैयार हैं.
पहले दौर के चुनाव में हुई धांधलियों की ख़बरों के बीच गत मंगलवार को हामिद करज़ई के दूसरे दौर के चुनाव के लिए राज़ी होने से पहले उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठकों का लंबा दौर चला है. इसमें फ़ोन के ज़रिए हुई बातचीत और अधिकारियों का क़ाबुल दौरा शामिल है.
संयुक्त राष्ट्र समर्थित चुनाव शिकायत आयोग ने हामिद करज़ई के खाते से लाखों वोट घटा दिए थे जिससे उनके खाते में वोटों की संख्या 50 प्रतिशत से कम हो गई थी. नियमों के अनुसार जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करना ज़रुरी है.
आयोग ने दूसरे दौर के चुनाव के लिए सैकड़ों भ्रष्ट अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया से हटाने और ऐसे मतदान केंद्रों को समाप्त करने के सुझाव दिए हैं, जहाँ पिछली बार सबसे ज़्यादा धांधली हुई थी.
लेकिन दूसरे दौर का चुनाव प्रचार अधिकृत रुप से शुरु होने के साथ ही तालेबान ने हिंसा की चेतावनी देते हुए लोगों से अपील की है कि वे इस चुनाव का बहिष्कार करें.
तालेबान इन चुनावों को 'अमरीकी प्रक्रिया' बताते हैं. लेकिन काबुल में बीबीसी के संवाददाता एंड्र्यू नॉर्थ का कहना है कि अब तक आम जनता के बीच चुनाव का कोई माहौल नहीं है.
उनका कहना है कि इसकी एक वजह यह है कि उम्मीदवार अपना ज़्य़ादा समय इन चर्चाओं में लगा रहे हैं कि चुनाव के बाद सरकार का गठन किस तरह से होगा, क्योंकि यह तय ही माना जा रहा है कि दूसरे दौर के बाद जीत हामिद करज़ई की ही होगी.
लेकिन अब्दुल्ला अब्दुल्ला के यह कहने के बाद कि वे हामिद करज़ई के सरकार में फिर से शामिल नहीं होना चाहते, इन अटकलों को बल मिला है कि चुनाव से पहले कोई समझौता हो सकता है.












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