मराठियों में फूट पड़ चुकी है: बाल ठाकरे

यही नहीं कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए बाल ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र को बेचने का काम अब और जोरों से होगा। ठाकरे ने कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की जीत को कौरवों की जीत तक कह डाला। बाल ठाकरे को इस बात का भी मलाल है कि एमएनएस जैसी पार्टी को भी जनता ने जीता दिया है।
अनजान हैं मराठी युवा
शिवसेना के मुखपत्र सामना में संपादकीय पृष्ठ पर शिवसेना प्रमुख ने अपनी सारी बातें रखीं। ठाकरे ने कहा, "हार के लिए हम महाराष्ट्र की जनता को कतई दोष नहीं देना चाहते, लेकिन इसके लिए शिवसेना के इतिहास से अनजान वे मराठी युवा जरूर जिम्मेदार हैं, जिन्होंने जोश में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को जिताने में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से मदद की है।"
इसके बाद ठाकरे ने लिखा है कि शिवसेना की हार की वजह से मराठियों की अस्मिता दांव पर लग चुकी है। उन्होंने लिखा, "शिवसेना के हिस्से आए पराभव के फूल हम संजोए रखेंगे। इससे यह साफ हो गया है कि शिवसेना अपना वर्चस्व कायम रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
40 साल में नहीं देखी ऐसी हार
आगे लिखा है, "कांग्रेस ने कांति की, ऐसा मत चिल्लाइए। मराठी वोट बांटकर, मराठी आदमी की एकता ब्रिटिश नीति से तोड़कर उन्होंने यह जीत हासिल की है। पिछले 40 साल के राजनैतिक करियर में हमने कई हार देखी है और उसके बाद मंत्रालय पर भगवा भी फहराया है। हमें दुख तो हुआ है, लेकिन हम आंसू ढालते नहीं रहेंगे। हम हमारी राजनीति, हमारे तरीके से करेंगे।
बालासाहब ने अपने संपादकीय में राज ठाकरे और नारायण राणे पर भी तीर चलाए। उन्होंने लिखा, '"कई दिग्गज नेता हार गए। कई नए लोगों को नवनिर्माण की लॉटरी लग गई है। मुख्यमंत्री बनने के लिए सेहरा बांधकर बार-बार दिल्ली जाने वाले नारायण राणे का कोंकण मे क्या हुआ है, यह अब कांग्रेस को पता चल गया होगा।"
ठाकरे ने आगे लिखा, "नई पीढी को नहीं पता कि मराठी मानुष के लिए शिवसेना ने क्या किया। लगता है कि उन्हें महाराष्ट्र के इतिहास के बारे में पता नहीं। तभी तो एक झटके में मराठी एकजुटता के टुकडे-टुकडे कर दिए। बाल ठाकरे ने आगे लिखा है कि महाराष्ट्र का दुर्भाग्य है कि कांग्रेस वापस सत्ता में आ गई।"












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