बांग्लादेशी इस्लामी संस्था पर प्रतिबंध

बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने देश में सक्रिय इस्लामी संगठन हिज़्ब उत तहरीर पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है.
बांग्लादेश के गृह सचिव सोभन सिकदर ने बताया कि देश में शांतिपूर्ण जीवन के लिए हिज़्ब उत तहरीर एक ख़तरा है.
ऐसा पहली बार हुआ है कि एक ऐसी इस्लामी संस्था, जिस पर किसी तरह के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप न हो, उसे प्रतिबंधित किया गया है.
संगठन ने इस प्रतिबंध की निंदा की है और कहा है कि सरकार उन्हें चुप नहीं करा सकती है. संगठन का आरोप है कि सरकार साम्राज्यवादी शक्तियों के साथ है.
सिकदर ने बताया, "सरकार ने हिज़्ब उत तहरीर पर प्रतिबंध लगाने का निश्चय किया है क्योंकि यह संस्था कानून और लोगों की सुरक्षा के लिए ख़तरा बन कर उपस्थित है."
इस वर्ष की शुरुआत में सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने विद्रोह किया था जिसमें सेना के 50 से ज़्यादा अधिकारी मारे गए थे. कथित तौर पर इस संगठन ने विद्रोह के समर्थन में पर्चे बांटे थे और इस वजह से हिज़्ब उत तहरीर के क़रीब 40 सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया था.
साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़
सिकदर ने बताया कि खुफ़िया विभाग 12 संगठनों पर लगातार निगरानी रखे हुए था. इनमें से चार संगठनों को पहले ही प्रतिबंध किया गया था. इन संगठनों पर सरकार ने 'आंतकवादी' और 'राज्य के ख़िलाफ़' गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है.
हालांकि हिज़्ब उत तहरीर के प्रमुख प्रोफ़ेसर मोहीउद्दीन अहमद ने आंतकवादी गतिविधियों में संगठन के शामिल होने के आरोप को ख़ारिज किया है.
उनका कहना है कि संगठन आंतकवाद और अन्य हिंसक कार्रवाई को इस्लाम की शिक्षा से पूरी तरह उलट मानती है.
प्रोफ़ेसर अहमद ने कहा कि पहले भी सरकार की इस तरह की कार्रवाई से उनका संगठन चुप नहीं हुआ और अब भी ऐसा ही होगा.
उन्होंने बताया, "मैं आपको अच्छी तरह से बता देना चाहता हूँ कि दुनिया के किसी भी भाग में जब भी किसी दमनकारी सरकार ने हम पर प्रतिबंध लगाया, हम चुप नहीं रहे. हमने साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ हमेशा से आवाज़ उठाई है. हम इस सरकार की भी साम्राज्यवादी नीतियों को उजागर करते रहेंगे."
गृह सचिव का कहना है कि खुफ़िया एजेंसी हिज़्ब उत तहरीर पर अपनी निगरानी जारी रखेगी जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके संगठन किसी अन्य नाम से फिर से उठ खड़ा न हो.
बीबीसी के बंगाली सेवा संपादक साबिर मुस्तफ़ा का कहना है कि हिज़्ब उत तहरीर, जिसके तार दुनिया भर में फैले हैं, विश्वविद्यालयों में सक्रिय रहा है.
छात्रों के बीच बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए सरकार संगठन से चिंतित थी.


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