संयुक्त राष्ट्र ने पक्षपात से किया इनकार

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने अपने एक पूर्व अधिकारी के आरोपों का खंडन किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में उनका मिशन राष्ट्रपति हामिद करज़ई के पक्ष में काम करता है.
यूएन के एक प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने मिशन की पक्षधरता संबंधी बातों को ख़ारिज करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को लेकर सार्वजनिक रूप से हो रहे विवाद बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
ग़ौरतलब है कि यूएन के एक वरिष्ठ अधिकारी पीटर गैलब्रैथ ने यह आरोप लगाया था कि मिशन ने अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान हुए धांधली की अनदेखी की थी जिससे चुनाव में करज़ई की जीत हुई.
इस आरोप के बाद पिछले हफ़्ते गैलब्रेथ को बर्ख़ास्त कर दिया गया था.
बर्ख़ास्तगी के बाद गैलब्रेथ ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र का 30 करोड़ डॉलर का मिशन अब 'नेतृत्वहीन' हो गया है. उन्होंने यूएन के विशेष दूत को एक 'टेरीबल मैनेजर' यानी अक्षम प्रबंधक कहा.
'बदले की भावना'
बीबीसी से बात करते हुए गैलब्रेथ ने संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि काय एडा पर आरोप लगाया कि वे चुनावी धांधली पर कार्रवाई करने में असफल रहे.
काय एडा ने इस आरोप का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमरीकी प्रशासन का पूरा सहयोग प्राप्त है.
एडा ने कहा, "मुझे लगता है कि उनके साथ जो हुआ है उसके बाद वे व्यक्तिगत बदले की भावना से प्रेरित हो गए हैं. मुझे नौकरी से नहीं निकाला गया है, बल्कि उन्हें निकाला गया है."
अगस्त महीने में हुए राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के कई आरोप लगाए गए थे. यूरोपीय संघ के चुनावी पर्यवेक्षकों के मुताबिक चुनाव में डाले गए वोट का लगभग एक चौथाई यानी 15 लाख वोट धांधली से डाले गए हो सकते हैं.
गैलब्रेथ ने बीबीसी को बताया, "जब काय एडा को पता चला कि इस साक्ष्य से करज़ई को नुकसान हो सकता है तो उन्होंने हमें कुछ भी नहीं करने का निर्देश दिया."
साथ ही उनका कहना था, "करज़ई के साथ उनके मधुर संबंध हैं और यूएन के प्रतिनिधि होने के बजाय वे करज़ई के आदमी बन गए. "


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