अपने पर मंडराते खतरे का अंदाजा लगा सकते हैं शिशु
नार्वेजियन युनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एनयूएसटी) में रुड वैन डर वील और अड्रे वैन डर मीर द्वारा किए गए अध्ययन में इस बात का पता लगाया गया है कि शिशु मस्तिष्क कैसे और किस जगह आसन्न टकराव के बारे में सूचना ग्रहण करता है।
टकराव के लिए आगे बढ़ने वाली वस्तु शिशु की रेटीना पर एक व्यापक छवि प्रस्तुत करती है। यह छवि इस बात की सूचना देती है कि कोई एक वस्तु आगे बढ़ रही है और वह कितनी खतरनाक है। इसके बाद यह छवि आंख से जुड़ी तंत्रिका तंत्र में तरंगें पैदा कर देती है।
शोधकर्ताओं ने पर्दे पर विकसित होती बहुरंगी वस्तु की तीन विभिन्न गतियों के साथ शिशु की ओर बढ़ने के दौरान, पांच से 11 माह आयु के 18 शिशुओं के मस्तिष्क की गतिविधि को मापने के लिए उच्च शक्ति की इलेट्रोएनसिफेलोग्राफी (ईसीजी) का इस्तेमाल किया।
एनयूएसटी की एक विज्ञप्ति में शोधकर्ताओं की ओर से कहा गया है, "चूंकि शिशुओं का स्वस्फूर्त गति पर बेहतर नियंत्रण होता है, लिहाजा आसन्न खतरे को समझने की उनकी बोधात्मक क्षमता बढ़ जाती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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