इशरत एंकाउंटर: जांच रिपोर्ट पर रोक

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति कल्पेश जावेरी ने तमांग रिपोर्ट पर यह कहते हुए रोक लगाई कि जांच का काम उनके दायरे से बाहर था। हालांकि गुजरात सरकार ने भी यही दावा किया था कि चूंकि मामला कोर्ट में चल रहा है, तो उसकी जांच अलग से कैसे करायी जा सकती है। इसी दावे के साथ गुजरात सरकार ने यह बात दोहराई कि वो आज भी इशरत व उसके साथियों को आतंकी मानती है।
तमांग ने दायरे से बाहर की जांच
न्यायमूर्ति जावेरी ने कहा कि कि तमांग रिपोर्ट का उद्देश्य केवल यह बताना था, कि इशरत की मौत प्राकृतिक थी या अप्राकृतिक, लेकिन मजिस्ट्रेट ने दूसरे पहलुओं, जैसे क्या यह कांड योजनाबद्ध तरीके से हुआ या इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद था, आदि की जांच कर डाली। यही नहीं यह कहना कि इशरत का एंकाउंटर फर्जी था, वो भी तमांग की जांच के बाहर था।
न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय द्धारा गठित केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व प्रमुख आर के राघवन की अध्यक्षता वाली कमेटी को इस घटना की विस्तृत जांच के आदेश भी दिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि तमांग रिपोर्ट महज एक दिन में तैयार की गई रिपोर्ट है। तमांग ने स्वंय 3 सितंबर को जांच का आदेश दिया और अगले ही दिन 4 सितंबर को उन्होंने जांच रिपोर्ट तैयार कर डाली। वो भी आरोपियों व अन्य पक्षों को बिना सुने रिपोर्ट तैयार कर दी। लिहाजा इस रिपोर्ट को आधार नहीं बनाया जा सकता।












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