'कांशीराम की इच्छापूर्ति के लिए लगीं मूर्तियां'

सरकारी खजाने से मूर्तियां लगाए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मायावती की तरफ से यह दलील पेश की गई कि स्वर्गीय कांशीराम ने कहा था कि उनकी मूर्ति के बगल में मायावती की मूर्ति भी बनवाई जाए।
याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया
माया के वकील की इस दलील पर याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि एक व्यक्ति की निजी इच्छा पूरी करने के लिए सरकारी पैसे का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
गौरतलब है कि मायावती ने उत्तर प्रदेश में कांशीराम अपनी और पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी की मूर्तियां स्थापित करने की परियोजना शुरू कर दी है। इसमें करीब 2000 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि एक तरफ राज्य सूखे की चपेट में है और दूसरी तरफ सरकारी खर्च पर मूर्तियां लगावायीं जा रही हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मायावती से इस मामले पर जवाब मांगा था। इसके अलावा चुनाव आयोग ने बसपा का चुनाव चिन्ह रद्द करने की सिफारिश भी की है।












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