अंसल बंधुओं को मिली ज़मानत

सुशील अंसल और गोपाल अंसल को निचली अदालत ने दोषी ठहराते हुए दो साल की सज़ा सुनाई थी लेकिन पिछले महीने दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी सज़ा घटाकर एक वर्ष कर दी थी.
हालांकि हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराया था.
13 जून, 1997 को उपहार सिनेमा में लगी आग में 59 लोग मारे गए थे जिसमें कई महिलाएँ और बच्चे शामिल थे.
दो याचिकाएँ
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में दो याचिकाएँ दायर की गईं थीं.
एक याचिका अंसल बंधुओं की ओर से दायर की गई थी जिसमें हाईकोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी गई थी और ज़मानत देने का अनुरोध किया गया था.
दूसरी याचिका उपहार सिनेमा अग्निकांड के शिकार हुए लोगों के परिजनों के संगठन ने दायर की थी जिसमें कहा गया था कि अंसल बंधुओं की सज़ा बढ़ाई जानी चाहिए क्योंकि वे भारतीय दंड विधान की धारा 304 के तहत ग़ैर-इरादतन हत्या के दोषी हैं.
मारे गए लोगों के परिजनों को न्याय पाने के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ा
न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा की अध्यक्षता वाले पीठ ने पीड़ितों की याचिका स्वीकार करते हुए अंसल बंधुओं को नोटिस जारी किया है.
लेकिन पीठ ने अंसल बंधुओं को 10-10 हज़ार रुपयों के निजी मुचलके पर ज़मानत दे दी है.
अंसल बंधु पिछले चार महीने से जेल में हैं.
मामला
निचली अदालत ने पाया था कि सिनेमाघर में आग एक ट्रांसफॉर्मर में शॉर्ट-सर्किट होने के कारण लगी थी और लोगों के लिए थिएटर से बाहर निकलने का सिर्फ़ एक रास्ता छोड़ा गया था.
निचली अदालत ने इस मामले में 12 लोगों को दोषी पाया था.
लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने सिनेमाघर के मालिक अंसल बंधुओं की सज़ा दो साल क़ैद से घटा कर एक साल कर दी थी.
निचली अदालत ने जिन 12 लोगों को दोषी पाया था उनमें से पांच को हाईकोर्ट ने बरी भी कर दिया था.
बरी किए जाने वाले लोगों में उपहार सिनेमा के मैनेजर निर्मल चोपड़ा भी शामिल थे.












Click it and Unblock the Notifications