बेंगलुरू में असुरक्षित हैं बुजुर्ग
बेंगलुरू, 28 जनवरी (आईएएनएस)। किसी समय पेंशन भोगियों के लिए स्वर्ग माने जाने वाले बेंगलुरू शहर में पिछली नौ जनवरी से लेकर अब तक हुई पांच बुजुर्गो की हत्या ने शहर के वरिष्ठ नागरिकों को हिला कर रख दिया है।
वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के लिए स्थापित की गई हेल्प लाइन (1090) की घंटी लगभग पिछले 20 दिनों से लगातार घनघना रही है।
शहर के अति सुरक्षित जयनगर इलाके में 11 दिनों के दौरान तीन वरिष्ठ नागरिकों सहित पांच व्यक्तियों की उनके घरों में ही हत्या कर दी गई।
एक सेवानिवृत्त उप महालेखाकार ए.एस.वेंकट रंगन (79) व उनकी पत्नी वसंता (72) की जयनगर स्थित उनके घर में 9 जनवरी को गला रेत कर हत्या कर दी गई। दोनों पति-पत्नी अकेले रहते थे। उनका एक बेटा मैसूर में रहता है, दूसरा अमेरिका में। दो बेटियां हैं, जो बेंगलुरू के विभिन्न इलाकों में अपने-अपने परिवार के साथ रहती हैं।
इस घटना के ठीक 11 दिन बाद रंगन दंपति के घर से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर एक सेवानिवृत्त स्कूल अध्यापिका सत्यभामा (84), उनकी बेटी विजयालक्ष्मी (55) व बहू जयश्री (45) की उनके घर में हत्या कर दी गई।
पूलिस ने इन दोनों मामलों में कई सारे लोगों से पूछताछ तो की, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है।
हेल्पलाइन के लिए काम करने वाले परामर्शदाताओं का कहना है कि बुजुर्गो की हत्या की इन घटनाओं ने वरिष्ठ नागरिकों के भीतर असुरक्षा का भाव भर दिया है।
परामर्शदाताओं के अनुसार यह हेल्पलाइन बेंगलुरू नगर पुलिस व नाइटैंगल्स मेडिकल ट्रस्ट नामक एक गैर सरकारी संगठन द्वारा सामूहिक रूप से चलाई जाती है।
हेल्पलाइन के परामर्शदाता कहते हैं, "जब से रंगन दंपति की हत्या की गई है, हेल्पलाइन पर वरिष्ठ नागरिकों की ओर से लगभग 450 फोन आ चुके हैं।"
अपना पूरा नाम बताने से इंकार करते हुए इल्डर्स हेल्पलाइन के एक परामर्शदाता कुमार ने आईएएनएस को बताया, "फोन करने वाले ज्यादातर बुजुर्ग अपनी बेहतर व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर परेशान थे। वे सभी दुखी व भयभीत थे।"
हेल्पलाइन के आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2008 के दौरान हत्या के मामलों के अलावा, 840 बुजुर्गो को अन्य तरह की प्रताड़ना व शोषण का शिकार होना पड़ा है।
वर्ष 2002 में अपनी शुरुआत के बाद से इस हेल्पलाइन ने अब तक वरिष्ठ नागरिकों की प्रताड़ना व शोषण के कुल 6,050 मामले दर्ज किए हैं।
पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि बेंगलुरू में हुई हत्या की घटनाओं में 20 प्रतिशत 60 वर्ष से ऊपर की उम्र वाले लोगों को शिकार बनाया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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