बिहार में अराजपत्रित कर्मचारियों की हड़ताल 22 वें दिन भी जारी

सरकार ने स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर बिना सूचना के अनुपस्थित कर्मचारियों से तीन दिनों के अंदर काम पर लौट आने की अपील की है।

हड़ताल के कारण सचिवालय से लेकर प्रखंड कार्यालय तक में सरकारी कार्य लगभग ठप हैं। इस कारण आम लोगों को काफी परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। राज्य में हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवायें पूरी तरह चरमरा गई हैं।

बिहार राज्य सचिवालय सेवा संघ के प्रवक्ता नित्यानंद सिंह ने बुधवार को आईएएनएस को बताया कि आज हड़ताल पर गए संघों के नेता राज्य में राजनीतिक दलों के नेताओं से मिलेंगे तथा उनको अपनी मांगों के विषय में बताते हुए समर्थन देने की गुजारिश करेंगे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की दमनकारी नीति के खिलाफ हड़ताली कर्मचारी आगामी 30 जनवरी को दमन विरोधी दिवस मनाएंगे।

बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) के अध्यक्ष रामनारायण राय ने बताया कि पड़ोसी राज्य झारखंड में चल रही कर्मचारियों की हड़ताल सरकार द्वारा मांगें मान लेने के बाद समाप्त हो गई, परंतु बिहार सरकार के अड़ियल रूख के कारण यहां हड़ताल 22वें दिन भी जारी है।

इस बीच राज्य सरकार के उपसचिव डा़ प्रमोद कुमार ने समाचार पत्रों में बुधवार को विज्ञापन प्रकाशित करवा कर अनुपस्थित कर्मचारियों को तीन दिनों के अंदर कार्य पर वापस आने की अपील की है। विज्ञापन में कर्मचारियों को चेतावनी दी गई है कि तीन दिनों के अंदर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि राज्य के अराजपत्रित कर्मचारी महासंघों और राज्य सचिवालय संघ तथा शिक्षकों के सात संगठनों वाले बिहार राज्य प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षाकर्मी संयुक्त मोर्चा के लगभग तीन लाख कर्मचारी गत सात जनवरी से केंद्र के समान छठे वेतनमान को लागू करने की मांग करते हुए हड़ताल पर हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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