मुंबई का दर्द व गुस्सा मैं भी महसूस करता हूं : मनमोहन
समाचार पत्र 'इकोनॉमिक टाइम्स' द्वारा स्थानीय ट्राइडेंट होटल में आयोजित एक पुरस्कार समारोह में मनमोहन ने कहा, "यह समारोह पिछले नवम्बर महीने में इसी होटल में होने वाला था लेकिन मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले के कारण इसे टाल दिया गया था। हालांकि मैंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ मुंबई का दौरा किया था लेकिन उस वक्त मुझे लोगों से बातचीत का मौका नहीं मिला था। आज के मौके पर उस दुखद घटना के बारे में मैं जरूर बोलना चाहूंगा।"
उन्होंने कहा, "मुंबई की घटना के निशान अभी भी शेष है। मैंने तीन वर्ष मुंबई में बिताए हैं। इसलिए मैं इस शहर के लोगों के गुस्से व उनके दर्द को महसूस कर सकता हूं। मुंबईवासियों के लिए मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति न हो इसके लिए मैं हरसंभव प्रयास करूंगा।"
उन्होंने कहा, "इस घटना के पीड़ितों के लिए मेरा दिल भी दर्द से कराह उठता है। मैं मुंबई पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के उन जवानों की बहादुरी को सलाम करता हूं जो आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "बहुत सोच समझ कर मुंबई को निशाना बनाया है। यह हमारी राष्ट्रीयता, स्वतंत्र, बहुलतावादी और महानगरीय सभ्यता पर हमला था। "
आतंकवादियों को चेतावनी देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "पूरा सभ्य समाज आतंकवाद के खिलाफ है। उन्हें भारतीय लोकतंत्र की जड़ों व उसकी खूबियों को समझना चाहिए। उन्हें यह भी समझना चाहिए कि कोई भी देश न तो आतंकवाद बर्दाश्त कर सकता है और न ही करेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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