80 बच्चों की 'अम्मा' हैं सबीना

बेंगलुरू, 17 जनवरी (आईएएनएस)। सबीना सोलोमन पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय से यहां के एक अनाथाश्रम में 80 बच्चों की अकेले देखभाल कर रही हैं। ये बच्चे उन्हें प्यार से 'अम्मा' कह कर पुकारते हैं। कन्नड़ में मां को अम्मा कहा जाता है।

यहां के शिवाजीनगर स्थित 'गुड न्यूज आउटरीच मिशन' अनाथाश्रम के संस्थापक निदेशक गणप्रगासम की अक्टूबर 2007 में मौत हो गई। इसके बाद अनाथाश्रम की जिम्मेदारी अचानक सबीना के सिर आ गई। सबीना की उम्र चालीस से कुछ ही ज्यादा है।

सबीना ने आईएएनएस को बताया, "मैं 17 वर्ष पहले इस अनाथाश्रम में एक दूल्हन के रूप में आई थी। मेरे पति डी.सोलोमन यहां वार्डन थे। छह वर्ष पहले पति की मौत हो गई। उसके बाद अपने तीन बच्चों सहित यहां के बच्चों की सेवा करने का मैंने निश्चय किया।"

उन्होंने आगे कहा, "लेकिन आश्रम के संस्थापक निदेशक की मौत के बाद इन बच्चों की देखभाल करने वाली मैं अकेली यहां बच गई। शुरू में तो मैं बहुत विचलित हुई। क्योंकि पैसा जुटाने से लेकर बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित कराने तक सब कुछ हमें ही करना था। पहले मैं बच्चों के लिए खाना पकाने और उन्हें पढ़ाने का काम करती थी। लेकिन निदेशक की मौत के बाद मुझे पूरी जिम्मेदारी संभालनी पड़ी।"

लेकिन सबीना निराश नहीं हुईं। यहां तक कि वित्तीय समस्याएं भी उनके इरादों को कमजोर न कर पाईं। वह अपने पति को याद करतीं और अपने काम में जुट जातीं।

उन्होंने कहा, "मैं बेंगलुरू के औद्योगिक घरानों व अन्य दानदाताओं की आभारी हूं। इन लोगों ने जरूरत के वक्त हमेशा आकर मदद की। अनाथाश्रम में पैसा प्रमुख मुद्दा है। लेकिन जब भी जरूरत पड़ती है, ईश्वर कृपा से कोई न कोई दानदाता हमारी मदद के लिए आ जाता है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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