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अमेरिका पर आतंकवादी हमले से सावधान रहने की जरूरत : बुश (लीड-1)

By Staff
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    वाशिंगटन, 16 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने अपने औपचारिक विदाई भाषण में अमेरिका की आगामी चुनौतियां गिनाते हुए आतंकवादियों से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने देश में भयावह आतंकवादी हमला दोहराए जाने की आशंका जताई। इसके साथ ही उन्होंने भारत के साथ 'नए ऐतिहासिक एवं रणनीतिक संबंधों' की शुरुआत और चीन के साथ संबंध मजबूत करने को अपने कार्यकाल की विदेश नीति की प्रमुख सफलताओं में शुमार किया है।

    व्हाइट हाउस ईस्ट रूम से बुश के इस विदाई भाषण का सीधा प्रसारण किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय संबोधन में कहा, "आने वाले दशक हमारे सामने कई अवसर और चुनौतियां पैदा करेंगे, पर हमें आगे बढ़ने के लिए कुछ ऐसे मार्गदर्शक सिद्धांत तय करने होंगे जो हमारी नियति को दिशा दें।"

    उन्होंने कहा कि यह सही है कि सात वर्ष पहले की तुलना में आज देश ज्यादा सुरक्षित है, लेकिन देश पर कोई भयावह आतंकी हमला होने का खतरा अभी भी मंडरा रहा है। बुश ने कहा, "हमारे दुश्मन बीमार मानसिकता के हैं, वे शांत बैठने वाले नहीं हैं। इस संघर्ष की पहल अमेरिका ने नहीं की है, इसलिए हालात पूरी तरह हमारे नियंत्रण में नहीं हैं।" बुश ने कहा कि अमेरिका को इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी दुनिया का भरोसा हासिल करना होगा। हमारा लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए।

    अमेरिकियों से विश्वासपूर्वक विश्व को स्वतंत्रता की शक्ति में परिवर्तित करना जारी रखने का आह्वान करते हुए बुश ने गुरुवार को अमेरिकी विदेश सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, "इन सार्वभौमिक आर्दशों ने हमारे राष्ट्र अमेरिका को जन्म दिया।"

    बुश ने कहा,"पिछले आठ बरसों से हम सभी ने मिलकर इन्हीं आदर्शो पर कार्य किया और इस विभाग का हरेक सदस्य नतीजों पर फख्र कर सकता है।" उन्होंने कहा, "एशिया में हमने पुराने मित्रों और सहयोगियों, जापान और दक्षिण कोरिया से रिश्ते प्रगाढ़ किए और चीन के साथ रिश्ते मजबूत किए।"

    उन्होंने कहा, "मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि यह ऐतिहासिक रूप से सही था या नहीं लेकिन संभवत: हमारा प्रशासन अकेला है जिसने एक ही समय में जापान, दक्षिण कोरिया और चीन के साथ रिश्ते बेहतर बनाए।"

    बुश ने असैन्य परमाणु सहयोग समझौते का नाम लिए बगैर कहा, "हमने भारत के साथ नई ऐतिहासिक और रणनीतिक भागीदारी की शुरुआत की।" उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में अमेरिका ने बाल्टिक और बाल्कन क्षेत्र के देशों को शामिल किया।

    राष्ट्रपति कहा कि उनके द्वारा लिए गए कड़े या विवादास्पद फैसलों पर सीमित बहस हो सकती है क्योंकि इनकी बदौलत अमेरिका महफूज रखा जा सका है। उन्होंने कहा, "ऐसे बहुत से फैसलों पर चर्चा हो सकती है लेकिन उनके नतीजों पर ज्यादा बहस की गुंजाइश नहीं है।" उन्होंने कहा कि अमेरिका पर पिछले सात वर्ष से भी ज्यादा अरसे में एक भी आतंकवादी हमला नहीं हुआ।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल का असली मूल्यांकन इतिहास करेगा। मंगलवार को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा के शपथ ग्रहण के साथ ही बुश के आठ वर्ष के कार्यकाल की विधिवत समाप्ति हो जाएगी। बुश ने कहा,"मैंने अपनी आत्मा की आवाज सुनी और जो ठीक समझा, किया। आप मेरे कड़े फैसलों से असहमत हो सकते हैं।"

    ओबामा भीषण आर्थिक मंदी, अफगानिस्तान और इराक में जारी सैन्य कार्रवाइयों और कुख्यात गुआंटोनामो खाड़ी स्थित जेल को बंद करने के अधूरे काम के साथ देश की बागडोर संभालने जा रहे हैं। अपने भाषण में बुश ने ओबामा को शुभकामनाएं भी दीं।

    1797 में अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज वाशिंगटन ने पद छोड़ने से पहले विदाई भाषण दिया था। तभी से यह पंरपरा आज तक जारी है। वैसे, इसका अपवाद भी रहा है। बुश के पिता जार्ज एच़ डब्ल्यू बुश ने राष्ट्रपति पद छोड़ने से पहले विदाई भाषण नहीं दिया था।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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