गणतंत्र दिवस परेड में दिखेगी कश्मीर में पहली रेलगाड़ी की झांकी
उल्लेखनीय है कि कश्मीर घाटी के लोगों का वर्षो पुराना सपना तब सच हो गया जब 11 अक्टूबर 2008 को प्रधानमंत्री ने कश्मीर में पहली रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
यह गौरवशाली परियोजना वर्ष 1998 में शुरू की गई थी। यह डीएमयू गाड़ी सेवा 66 किलोमीटर की दूरी में 9 स्टेशनों से होती हुई अपनी यात्रा पूरी करती है। ये स्टेशन हैं - बडगाम, श्रीनगर, पाम्पोर, काकापोरा, अवन्तिपुरा, पंजगाम और बीजबेहारा, राजवंशेर और अनंतनाग। यह गाड़ी दिन में दो बार चलती है और अपनी पूरी यात्रा एक घंटे 35 मिनट में पूरी करती है।
इसके 1400 एचपी डीजल चालित ईएमयू इंजन में तापन प्रणाली की व्यवस्था है जिससे सर्दियों के दिनों में भी इसे शीघ्र और बिना किसी परेशानी के चालू किया जा सकता है। सर्दियों के दिनों में ट्रैक से बर्फ हटाने के लिए इसकी डीजल चालित कार में 'स्नो कटिग कैटल गार्ड' की व्यवस्था है। हर डिब्बे की क्षमता 90 यात्रियों के बैठने की है। जम्मू और बारामूला के बीच रेल लिक के द्वारा भारतीय रेल कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने की प्रक्रिया में आगे बढ़ रही है।
भारतीय रेल देश के एक कोने से दूसरे कोने तक रोज एक करोड़ 70 लाख यात्रियों और 20 लाख टन माल को अपने गतंव्य तक पहुंचाती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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