असम में बीहू के मौके पर हो रही है शांति के लिए प्रार्थना
पंकज का कहना है कि इसे मौके का पूरा इस्तेमाल शांति बहाली के लिए होना चाहिए। उन्हें उम्मीद है कि आतंकवादियों को खून-खराबे की राह छोड़ने की प्रेरणा मिलेगी। ऐसा सोचने वाले वे अकेले शख्स नहीं हैं।
बीते साल असम को कई बम विस्फोटों की त्रासदी झेलनी पड़ी। यहां तक कि नए साल का आगाज भी असम में विस्फोटों से हुआ और पहले ही दिन गुवाहाटी तीन धमाकों से थर्रा उठा। फिर नौ जनवरी को ऐसे हमले दोहराए गए। कुल नौ लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।
असम की जानी-मानी गायिका तराली शर्मा भी पंकज की भावना से इत्तेफाक रखती हैं। वे आईएएनएस से बातचीत में कहती हैं, "बीहू मौज-मस्ती का त्योहार है, लेकिन जब लोग आतंकवाद के साये में हों तो वे जश्न कैसे मना सकते हैं? हम तो सिर्फ शांति के लिए ही प्रार्थना कर सकते हैं।"
भोगली बीहू भारत के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले मकर संक्रांति त्योहार जैसा ही है। इस मौेके पर असम के लोग दोस्तों और संबंधियों से मिलकर उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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