मध्यप्रदेश में लाखों लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी (लीड-1)
भोपाल 14 जनवरी (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में मकर संक्राति का पर्व श्रद्धा और सद्भाव के साथ मनाया गया। पवित्र नदियों के तट पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और देवालयों में पहुंचकर पूजा अर्चना की। जगह-जगह पारंपरिक कार्यक्रमों का दौर चला और मेलों में पहुंचे लोगों ने खूब मजा लिया।
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के अवसर पर मकर संक्राति का पर्व मनाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, विशेष पूजा अर्चना और तिल-गुड़ को खाने का विशेष महत्व है। इसी के चलते बुधवार की सुबह से ही श्रद्धालुओं का पवित्र नदियों के तट पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा।
मध्यप्रदेश के बहुत बड़े हिस्से से होकर नर्मदा नदी निकली है। इस नदी के तट पर होशंगाबाद और जबलपुर में मकर संक्राति के मेले लगे तथा यहां पहुंचकर लाखों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई।
होशंगाबाद की पुलिस अधीक्षक दीपिका सूरी ने आईएएनएस को बताया है कि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखकर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। किसी अनहोनी से निपटने के लिए तैराकों और गोताखोरों को हर घाट पर तैनात किया गया था।
उधर होशंगाबाद में डुबकी लगाने आए एक व्यक्ति की डूबकर मौत होने की खबर है।
उज्जैन में क्षिप्रा नदी में भी श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई, सूर्य को अघ्र्य दिया और महाकाल मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा अर्चना की। क्षिप्रा नदी में अपेक्षाकृत पानी कम होने से श्रद्धालु स्नान का भी ज्यादा मजा नहीं ले पाए। श्रद्धालुओं ने गरीबों और भिखारियों को तिल तथा चावल का दान कर पुण्य अर्जित किया।
उज्जैन के पुलिस अधीक्षक मनमीत नारंग ने बताया कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। ओरछा में बेतवा नदी के तट पर श्रद्धालुओं ने शरीर पर तिल का लेप करके स्नान किया। साथ ही राम राजा मंदिर में पूजा की।
इसी तरह सीहोर के प्राचीन चिन्तामणि सिद्ध गणेश मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रही। यहां प्रदेश के विभिन्न स्थानों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा अर्चना कर मन्नत मांगी। राजा विक्रमादित्य कालीन इस मंदिर की मान्यता को लेकर कई तरह की किवदंतियां हैं।
मकर संक्रांति पर भोपाल और इन्दौर में पतंग बाजी तथा गिल्ली डंडा प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन्दौर में संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गिल्ली डंडा खेलकर और पतंग उड़ाकर मकर संक्रांति को मनाया। यहां महिलाएं भी पतंग उडाने में पीछे नहीं रहीं।
इंडो - एशियन न्यूज सर्विस।












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