चिदंबरम को बर्दाश्त नहीं
मुरली कृष्णन
नई दिल्ली, 14 जनवरी(आईएएनएस)। मुंबई हमलों को देश की सुरक्षा चुनौतियों का चरम बिंदु करार देने वाले गृहमंत्री पी़ चिदंबरम धुन के पक्के हैं। उन्होंने देश की सुरक्षा को पूरी तरह अभेद्य बनाने के लिए 150 दिनों की समय सीमा तय की है, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे रणनीतियां तय करने में लगे रहते हैं।
जब से उन्होंने इस मंत्रालय की कमान संभाली है, उनकी व्यस्तता चरम पर पहुंच गई है। गृह मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि चिदंबरम बिना कोई पल गंवाए अपनी हर रणनीति को अमल में लाना चाहते हैं। उन्हें प्रशासनिक सुस्ती बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है। अधिकारियों से उनकी अपेक्षाओं की सूची लंबी है और अधिकारी बताते हैं कि इनमें से अधिकांश सुरक्षा योजनाएं अमल के लायक हैं।
वे सुरक्षा बलों के लिए अत्याधुनिक हथियारों, उपकरणों, संचार प्रणालियों आदि की खरीदारी में किसी भी तरह की ढील नहीं चाहते। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि इन उपकरणों व हथियारों की खरीद में किसी तरह की लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं होगी। इस बारे में अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, "चिदंबरम ने सुरक्षा बलों के हथियारों और उपकरणों की खरीदारी के लिए तय बजट का ब्यौरा सौंपने की समय सीमा 10 जनवरी तय की थी। सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों को इस समय सीमा के अंदर ब्यौरा देने को कहा गया।"
सूत्र के मुताबिक चिदंबरम 15 जनवरी से खुद प्रत्येक सुरक्षा बल की जरूरतों, और उनकी कमियों का आकलन करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस संवाददाता को बताया, "मुंबई हमलों से चिदंबरम काफी नाराज हैं। ऐसी चुनौती से निपटने के लिए वह ताबड़तोड़ बैठकें कर रहे हैं, जिनमें भविष्य की रणनीतियां तैयार की जाती हैं। चिदंबरम नतीजे को लेकर काफी गंभीर हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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