गांधी की यादों से जुड़ी जेल में सजा भुगतने वाले नायडू को प्रवासी सम्मान

नायडू रंगभेद के खिलाफ संघर्ष करते हुए जेल गए। उन्हें उस किलानुमा जेल, जो अब कांस्टीट्यूशनल कोर्ट का परिसर है, में रखा गया था, जिसमें एक सदी पहले गांधी और फिर बाद में नेल्सन मंडेला को रखा गया। दो साल पहले गांधी जयंती के मौके पर नायडू ने इस जेल के द्वार पर खड़ा होकर अपनी यातनापूर्ण जेल यात्रा को याद किया था। इस मौके पर एक भारतीय कठपुतली दल ने शो दिखाया था।

नायडू के उसी संघर्ष और दक्षिणी अफ्रीकी स्वतंत्रता संघर्ष में योगदान को देखते हुए 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार से नवाजा गया। वह उन दर्जन भर प्रवासियों की जमात में शामिल हैं, जिन्हें शुक्रवार को यहां के कनवेंशन सेंटर में इस पुरस्कार से राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा नवाजा गया।

रंगभेद काल के दौरान स्वतंत्रता संघर्ष को कमजोर करने और लाखों भारतीयों के तुष्टिकरण के लिए अंग्रेजों द्वारा गठित संगठन साउथ अफ्रीकन इंडियन काउंसिल कमिटी को कमजोर करने के लिए नायडू ने खुद इसकी सदस्या हासिल की थी। इससे खफा होकर औपनिवेशिक शासकों ने उन्हें उत्पीड़ित किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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