कोलंबिया शटल दुर्घटना की जाँच रिपोर्ट जारी

अंतरिक्ष से लौटते हुए एक फ़रवरी 2003 को कोलंबिया शटल दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी और इसमें सवार भारतीय मूल की कल्पना चावला समेत सभी सातों अंतरिक्ष यात्री मारे गए थे.
'41 सेकेंड पहले पता चला'
नासा ने 400 पन्ने की रिपोर्ट में कहा है कि सातों अंतरिक्ष यात्रियों को आख़िरी क्षण के कम से कम 41 सेकिंड पहले पता चल गया था कि उन्होंने शटल पर नियंत्रण खो दिया है.
इसके बाद वे गर्म गैसों के कारण बेहोश हो गए. ये दुर्घटना इस शटल कार्यक्रम के 28वें मिशन के दौरान हुई थी. माना जा रहा है कि किसी भी शटल दुर्घटना की ये सबसे व्यापक जाँच थी.
जाँच से पता चला है कि आंतरिक्ष यात्रियों के स्पेस सूट, हेलमेट इत्यादि ने कारगर तरीके के काम नहीं किया.
इस रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की है कि चाहे कोलंबिया के बहादुर चालक दल ने शटल पर नियंत्रण रखने का हर संभव प्रयास किया लेकिन इस दुर्घटना से उनका जीवित बचना संभव नहीं था नासा के उप संयुक्त प्रबंधक हेल
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नासा के उप संयुक्त प्रबंधक हेयन हेल का कहना था, "इस रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की है कि चाहे कोलंबिया के बहादुर चालक दल ने शटल पर नियंत्रण रखने का हर संभव प्रयास किया लेकिन इस दुर्घटना से उनका जीवित बचना संभव नहीं था."
दुर्घटना का कारण शटल के बाएँ विंग को बढ़ती गर्मी को रोकने वाली टाइलों के उखड़ने से हुई क्षति थी.
जब शटल पृथ्वी के वायुमंडल में वापस दाख़िल हुई तो गर्म हवाओं का शटल में घुसना उसके लिए घातक साबित हुआ.
नासा ने पाया कि अंतरिक्ष यात्रियों को इतना प्रशिक्षण नहीं था कि उनके जीवित बचने की संभावना बढ़ सकती.
हेल का ये भी कहना ता कि अमरीका और विश्व में अन्य जगहों पर अंतरिक्ष यान डिज़ाइन करने वालों को इस रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए और इस दुर्घटना से मिले सबक को ग्रहण करना चाहिए.












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