कश्मीर में भारी मतदान से अलगाववादी हुए पस्त

श्रीनगर, 25 दिसम्बर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर में हुए विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करने वाले कुछ अलगाववादी नेता राज्य में हुए भारी मतदान को देखते हुए अपने फैसले पर फिर से विचार करने लगे हैं।

विभिन्न चरणों में करीब एक माह तक चले मतदान में बेरोजगारी, शिक्षा, स्वस्थ्य और नागरिक सुविधाओं जैसे स्थानीय मुद्दों पर लोगों ने बढ़चढ़कर मतदान किया।

बुधवार को कश्मीर में हुए मतदान में 55 फीसदी कश्मीरियों ने मताधिकार का उपयोग किया। राज्य में हुए सातों चरणों के मतदान में औसतन 63 फीसदी मतदान हुए।

बुधवार को श्रीनगर के हजरतबल विधानसभा क्षेत्र में पहली बार मतदान करने वाले 18 वर्षीय शौकत अहमद ने कहा, "जब तक कश्मीर की समस्या नहीं सुलझती तब तक दिन प्रतिदिन की समस्या नहीं इंतजार नहीं कर सकती।"

एक वरिष्ठ शिया नेता और उदारवादी हुर्रियत के सदस्य आगा सइद हसन ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा, "यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला था। मैं मानना हूं कि फैसला लेने से पहले इस पर ठीक तरीके से बहस नहीं हुई।"

वैसे तो अलगाववादियों के बहिष्कार को लोगों ने खारिज कर दिया है लेकिन अलगाववादी इसे स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है और उनका कहना है कि कश्मीर की समस्या से चुनावी आंकड़ों का कुछ लेना देना नहीं है। हालांकि, श्रीनगर जिले के आठ विधानसभा क्षेत्रों में हुए 20 प्रतिशत मतदान ने अलगाववादियों को अपना चेहरा बचाने का मौका दिया है।

उच्च मतदान प्रतिशत के बारे में मीरवाइज उमर फारूक ने एक बयान जारी कर कहा, "प्रशासन ने सभी अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था। उसने घाटी को छावनी में तब्दील कर दिया था। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस सच्चाई पर जरूर ध्यान देना चाहिए।"

एक दैनिक समाचार पत्र के संपादक बशिर मंजर ने कहा, "मीरवाइज जो चाहते हैं उसे कहने का उनके पास अधिकार है लेकिन सच्चाई यह है कि कश्मीरियों ने अलगाववादियों की अपील को खारिज करते हुए मतदान करने का फैसला किया।"

उन्होंने कहा, "यह जरूर है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी लेकिन कोई यह दावा नहीं कर सकता कि किसी को जबर्दस्ती मतदान केंद्र तक लाया गया हो।"

अलगाववादी नेताओं में सबसे ज्यादा हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के चेयरमैन सैयद अली गिलानी मतदान प्रतिशत को लेकर काफी परेशान हैं।

गिलानी के लिए चिंता की बात यह है कि उनके बहिष्कार के बावजूद उनके मूल संगठन जमात ए इस्लामी के कुछ सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+