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आरआर पाटिल गए, देशमुख भी जाएँगे?

By Staff
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आरआर पाटिल गए, देशमुख भी जाएँगे?

उन्होंने पहले कहा था कि वे इस्तीफ़ा नहीं देंगे लेकिन सोमवार को उन्होंने 'अंतरात्मा की आवाज़' पर अपना इस्तीफ़ा मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को भेज दिया है.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता शरद पवार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि आरआर पाटिल ने उनसे सुबह मुलाक़ात करके इस्तीफ़ा देने की इच्छा जताई थी.

मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने शनिवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इस्तीफ़े की पेशकश पहले ही कर दी थी और इसके बारे में फ़ैसला कांग्रेस आलाकमान को करना है.

उनका कहना है कि पार्टी आलाकमान जो भी फ़ैसला करेगा, उन्हें मंज़ूर होगा.

रक्षा मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि विलासराव देशमुख ने इस्तीफ़े का प्रस्ताव किया है और इस पर विचार विमर्श जारी है.

उनका कहना था कि इस संबंध में सहयोगी दलों से भी चर्चा हो रही है और एक दो दिनों में इसका फ़ैसला होने की संभावना है.

उल्लेखनीय है कि रविवार को मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों की 'नैतिक ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए' शिवराज पाटिल ने गृहमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. जिसे स्वीकार कर लिया गया है और पी चिदंबरम को अगला गृहमंत्री नियुक्त किया गया है.

पाटिल का इस्तीफ़ा

रविवार को देर रात एनसीपी ने अपनी बैठक के बाद संकेत दिए थे कि अगर कांग्रेस अपने मुख्यमंत्री से इस्तीफ़ा लेगी तो वो भी एनसीपी के उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल से इस्तीफ़ा ले सकते हैं लेकिन आरआर पाटिल के इस्तीफ़े की घोषणा पहले हो गई है.

एनसीपी के नेता शरद पवार ने पाटिल की इस्तीफ़े की पुष्टि करते हुए कहा है कि 'आरआर पाटिल मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों की ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा देना चाहते थे'.

ख़बरें हैं कि शरद पवार ने मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख से आरआर पाटिल का इस्तीफ़ा स्वीकार करने को कहा है.

मीडिया रिपोर्ट हैं कि आरआर पाटिल इस्तीफ़ा मुख्यमंत्री को भेजने के बाद अपने गृह नगर सांगली के लिए रवाना हो गए हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एनसीपी ने गृहमंत्री आरआर पाटिल का इस्तीफ़ा पहले दिलवाकर एक तरह से कांग्रेस पर दबाव बढ़ा दिया है कि अब वह मुख्यमंत्री को हटाए.

देशमुख पर दबाव

इन दो इस्तीफ़ों के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख पर इस्तीफ़े का दबाव और बढ़ गया है.

विपक्षी दल तो पहले ही उनसे इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे लेकिन अब कांग्रेस के नेता ही उनके ख़िलाफ़ खड़े हुए दिख रहे हैं.

मुंबई में कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं में से एक मुरली देवड़ा के पुत्र और दक्षिण मुंबई के सांसद मिलिंद देवड़ा ने कहा है कि किसी न किसी की ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए और ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए जिससे जनता आश्वस्त हो सके.

यहां तक कि दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के प्रभारी वीरप्पा मोयली ने साफ़ कह दिया कि देशमुख का रवैया ठीक नहीं है और उनकी 'बॉडी लैंग्वेज' से ग़लत संदेश जाते हैं.

दरअसल ताज पैलेस में मुठभेड़ खत्म होने के बाद जिस तरह से मुख्यमंत्री देशमुख बॉलीवुड के निर्देशक रामगोपाल वर्मा और अपने पुत्र रीतेश देशमुख को लेकर इन स्थानों पर गए उससे लोग बेहद नाराज़ हैं और देशमुख की कड़ी आलोचना हो रही है.

हमलों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है

रविवार की रात जब एक अस्पताल में देशमुख से बीबीसी ने पूछा कि क्या उनपर दबाव है तो उन्होंने कहना था, "आपका ही दबाव है. इस्तीफ़े का नहीं. मैं अपना काम कर रहा हूं. यहां घायलों से मिलने आया हूं. मैं अपना काम कर रहा हूं."

हालांकि जिस तरह से लोग रविवार को कई स्थानों पर सड़कों पर आ गए और 'राजनीतिज्ञ मुर्दाबाद' के नारे लगाए उससे लगता नहीं है कि देशमुख अपनी कुर्सी बचा लेंगे क्योंकि इस माहौल में सोमवार को भी लोग सड़कों पर आ सकते हैं.

अभी भी लोगों की नाराज़गी मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल से है. खुफिया तंत्र की कमज़ोरी और उसके बाद आआर पाटिल के एक बयान ने आग में घी का काम किया.

पाटिल ने कहा था कि 'बड़े शहरों में छोटी बातें होती रहती हैं'.

मुंबई में शायद पहली बार ऐसा देखा गया कि लोग छोटी छोटी टोलियों में बाहर आए और राजनेताओं की आलोचना की.

शिवराज पाटिल के कामकाज पर लंबे समय से सवाल खड़े किए जा रहे थे

यहाँ तक कि स्टेशन पर ट्रेनें पकड़ने आए दो चार लोगों ने नारे लगाए तो बाकी लोगों ने उनका साथ दिया. ये लोग नारे लगा रहे थे 'राजनीतिज्ञ मुर्दाबाद' और 'राजनीति बंद करो'. हालांकि वहाँ कोई मीडिया भी नहीं था.

इतना ही नहीं शाम को मुंबई में एक एसएमएस भेजा जाने लगा जिसमें लिखा था कि मुख्यमंत्री ने इस्तीफ़ा दे दिया है और पृथ्वीराज चौहान नए मुख्यमंत्री होंगे.

यह ख़बर ग़लत तो थी लेकिन इसका संदेश साफ था कि राजनीति की सुई तेज़ी से घूम रही है.

पाटिल की बिदाई

रविवार को शिवराज पाटिल ने गृहमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

भारत के विभिन्न शहरों में पिछली जुलाई से हो रहे चरमपंथी हमलों के बाद से उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जा रहे थे और दिल्ली में हुए विस्फोटों के बाद उनके इस्तीफ़े की माँग उठी थी.

लेकिन मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद वे बच नहीं सके. शनिवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में उनकी पार्टी के नेताओं ने उनके ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया था.

इसके बाद उनसे इस्तीफ़ा ले लिया गया और वित्तमंत्री पी चिदंबरम को नया गृहमंत्री नियुक्त कर दिया गया.

ख़बरें हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन सहित कई आला अधिकारियों पर अभी यह ख़तरा मंडरा रहा है कि उन्हें इस्तीफ़ा देने को कहा जाए.

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