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भारत के आरोप से पाकिस्तान में बेचैनी

By Staff
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भारत के आरोप से पाकिस्तान में बेचैनी

आरोप है कि आतंकवादी भारत के लिए कराची से ही रवाना हुए थे.

कराची में एक एयरलाइन के कर्मचारी ने कहा, "वे हमेशा हम पर ही क्यों दोष मढ़ते हैं? जब भी भारत में कुछ होता है, वे कहते हैं कि इसमें पाकिस्तान का हाथ है लेकिन उनको इसका कोई सबूत नहीं मिलता."

एक बुटीक के मालिक उनसे सहमत हैं, "हर कोई हमारे पीछे पड़ा है." उनके ग्राहक भी कहते हैं कि भारत बदला लेने के लिए 'अपने एजेंटों की मदद से' कराची में हमले कराएगा.

पाकिस्तान के लोग इन आरोपों से पूरी तरह इनकार तो करते हैं लेकिन ये सच अपनी जगह क़ायम है कि वहाँ स्थित इस्लामी चरमपंथी गुट भारत के ख़िलाफ़ कश्मीर में लड़ाई लड़ते रहे हैं.

संबंध से इंकार

इन्हीं में से एक प्रमुख चरमपंथी गुट लश्करे-तैबा पर भारत की संसद पर 2001 में हुए हमले में शामिल होने का आरोप है, इस हमले ने दोनों देशों को युद्ध के कगार पर ला दिया था.

पाकिस्तान विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को संबंधों में दरार आने की आशंका है

पाकिस्तानियों का कहना है कि भारत अपने आरोपों में वास्तविकता का ध्यान नहीं रखता है.

रक्षा विशेषज्ञ हसन अस्करी रिज़वी ने एक स्थानीय दैनिक समाचार पत्र में लिखा, "यह बहुत दिलचस्प है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ इतनी बड़ी साज़िश का पता लगाने में तो नाकाम हो गईं और सारा समय पाकिस्तानी गुटों पर आरोप लगाने में बर्बाद कर दिया."

उन्होंने कहा है, "अगर वे जान गए थे कि इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है तो वे इसे क्यों नहीं रोक पाए? भारत को घर में ही पल रहे कट्टरवाद के सच को समझना चाहिए, अपनी समस्याओं के लिए पाकिस्तान पर आरोप लगाने की निरर्थकता को समझना चाहिए."

वास्तविकता से दूर

रिज़वी ने पाकिस्तान के लोगों की लगभग आम राय को व्यक्त किया है, भारत पिछले कुछ सालों में अपने ही देश में पल रहे कुछ इस्लामिक गुटों से पैदा होने वाली समस्याओं को नकारता आया है जिसकी जड़ें मुसलमानों के साथ भेदभाव और सांप्रदायिक हिंसा में है.

फरवरी 2007 में नई दिल्ली और लाहौर के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में हुई बमबारी का आरोप सबसे पहले पाकिस्तान पर लगाया गया था, लेकिन बाद में इसका संबंध एक हिंदू उग्रवादी संगठन से बताया जाने लगा.

पाकिस्तान की सरकार और सेना दोनों ने ही भारत को आगाह किया है कि वह जल्दबाज़ी में किसी निर्णय पर पहुँचने से बचे.

तार पाकिस्तान से जुड़े हैं

राजनीतिक नेताओं ने मुंबई हमलों की निंदा करते हुए इसकी जाँच में बिना शर्त सहायता देने की पेशकश की है और इसमें किसी पाकिस्तानी सूत्र के होने पर उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का वायदा किया है.

पिछले साल जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के नेतृत्व वाली सरकार के जाने के बाद वे भारत के साथ किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते हैं.

विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, "मैं चिंतित हूँ क्योंकि मैं इससे अगली कार्रवाई समझ सकता हूँ. हमें सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए क्योंकि स्थिति काफ़ी गंभीर है और भारत के लोग इसे अपना 9/11 की तरह बता रहे हैं."

संबंधों में दरार

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि संबंधों में आई यह दरार जल्द ही भर जाएगी.

शनिवार को एक वरिष्ठ सेना अधिकारी ने कहा कि अगर भारत अपनी सेना बढ़ाएगा तो वे भी उसी तरह से जवाब देंगे.

भारतीय नेताओं ने पाकिस्तान पर दबाव डाला कि वह ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख को भारत भेजे जिसके लिए पाकिस्तान पहले तैयार हो गया लेकिन बाद में एक बैठक करके निर्णय लिया गया कि आईएसआई के प्रमुख नहीं बल्कि एक प्रतिनिधि को भेजा जाएगा.

राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी ने इसे संवाद की कमी बताया, तो दूसरों ने इसकी घोषणा करने से पहले सेना से सलाह न लेने का परिणाम बताया.

ज़रदारी ने वादा तो कर दिया था लेकिन पाकिस्तान की सेना इसके लिए तैयार नहीं हुई और निर्णय बदलना पड़ा.

यह देखना अभी बाकी है कि अमरीका और भारत के दबाव से दोनों देशों के संबंधों में आई यह खटास और बढ़ती है या नहीं.

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