इस काली मंदिर में पूजा करना है तो पैसे निकालिए !

बांदा, 23 नवंबर (आईएएनएस)। अगर आप इस मंदिर में पूजा करने जा रहे हैं तो जाने से पहले अपनी जेबें टटोल लें, क्योंकि यहां पूजा करने के देने पड़ते हैं पैसे। यह अनोखा चलन उत्तरप्रदेश के बांदा जिले में स्थित प्रसिद्ध काली मंदिर में है।

बांदा, 23 नवंबर (आईएएनएस)। अगर आप इस मंदिर में पूजा करने जा रहे हैं तो जाने से पहले अपनी जेबें टटोल लें, क्योंकि यहां पूजा करने के देने पड़ते हैं पैसे। यह अनोखा चलन उत्तरप्रदेश के बांदा जिले में स्थित प्रसिद्ध काली मंदिर में है।

भले ही यह सुनने में अटपटा लगता हो लेकिन मंदिर में लगी रेट लिस्ट सारी हकीकत बयां करती है। शादी, नया वाहन, नौकरी, संतान प्राप्ति और व्यापार लाभ के लिए अलग-अलग पूजा हेतु अलग-अलग रेट फिक्स हैं।

सबसे ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ती है नई नवेली दुल्हन को दर्शन कराने के लिए। इसके लिए सर्वाधिक 101 रूपये निर्धारित हैं। इसी तरह संतान प्राप्ति की पूजा के लिए 51 रूपये, मनचाही नौकरी के लिए 21 रूपये और वाहन पूजा के लिए 11 रूपये अदा करने पड़ते हैं।

शहर के बाबूलाल चौराहे पर स्थित 100 वर्ष से भी ज्यादा प्राचीन इस काली मंदिर में हर रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं। मंदिर में पूजा की दर-सूची लगाने के सवाल पर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष राकेश मिश्रा का कहना है, "श्रद्धालुओं को ढोंग और ठगी से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे मंदिर के पुजारी पूजा के नाम पर श्रद्धालुओं से मनमानी दक्षिणा नहीं वसूल सकेंगे।"

अपनी नई नवेली बहू को लेकर मंदिर पूजा कराने आई कालूकुआं इलाके की प्रतिभा शुक्ला कहती है, "आमतौर पर इस तरह के मौकों पर मंदिरों में अलग-अलग पुजारियों को दक्षिणा देने में ज्यादा पैसे लग जाते हैं, हालांकि इस तरह के मौकों पर कोई पैसों की परवाह नहीं करता लेकिन पूजा के लिए रेट निर्धारित हो जाने पर एक ही बार पैसे देने पड़ेंगे।''

कुछ श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में पूजा के लिए रेट निधा्ररित करने के चलन को गलत बताने पर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष सफाई देते हुए कहते हैं कि श्रद्धालुओं द्वारा ठगी की शिकायतें मिलने के बाद इसी साल की शुरूआत से समिति द्वारा यह फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से पारदर्शिता आती है।

मंदिर की आय के बारे में पूछे जाने पर मिश्रा कुछ भी बताने से इनकार करते हैं। हालांकि वह बताते हैं कि हर माह मंदिर में एक विशाल लंगर का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा समय-समय पर प्रबंध समिति द्वारा माता का जगराता और अन्य कार्यक्रम कराए जाते हैं।

मंदिर में भले ही पूजा के पैसे के लगने लगे हों लेकिन भक्तों की श्रद्धा पर इसका कोई इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। मंदिर के बाहर फूल की पुश्तैनी दुकान लगाने वाले गोपाल कहते हैं कि आज भी उसी तरह श्रद्धालुओं का हुजूम लगता है जैसा कि पहले लगता था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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