'कश्मीर में सक्रिय विद्रोही आतंकवादी हैं'

ये बातें ज़रदारी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से साक्षात्कर में कहीं. ये शायद पहली दफ़ा है कि किसी पाकिस्तानी नेता ने ऐसा बयान दिया है.
ज़रदारी ने कहा, "भारत कभी भी पाकिस्तान के लिए ख़तरा नहीं रहा है. न मैं और न ही हमारे देश की लोकतांत्रिक सरकार विदेशों में भारतीय प्रभाव से डरी हुई है."
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक ज़रदारी ने कहा कि कश्मीर में सक्रिय विद्रोही आतंकवादी हैं, अख़बार ने लिखा है कि आम तौर पर उम्मीद यही होती है कि ज़रदारी उन्हें आज़ादी की लड़ाई में जुटे लोग की संज्ञा देंगे.
एक सवाल के जबाव में ज़रदारी ने कहा कि जब तक पाकिस्तान के साथ समान बर्ताव होता है तब तक उन्हें भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर कोई एतराज़ नहीं है.
उन्होंने कहा, "अगर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र से दोस्ताना संबंध हैं तो मुझे क्या आपत्ति हो सकती है."
भारत से ख़तरा नहीं
भारत के साथ बेहतर संबंध के बारे में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसे देश आर्थिक तौर पर टिक नहीं सकते, उन्हें पड़ोसी देशों के साथ व्यापार करना ही पड़ता है.
पाकिस्तान में केंद्रीय बैंक के पास विदेशी मुद्रा का भंडार इतना भर है कि वो दो महीने तक तेल और खाद्य सामग्री के आयात का ख़र्च उठा सकता है. इस आर्थिक संकट पर ज़रदारी का कहना था कि वो बाक़ी देशों से 100 अरब डॉलर की उम्मीद करते हैं.
अख़बार में लिखा गया है कि ज़रदारी की कल्पना है कि कि भारत में आधारभात ढाँचे की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पाकिस्तानी सिमेंट फ़ैक्ट्रियाँ काम करें, पाकिस्तानी टेक्सटाइल मिलें भारत को सामग्री उपलब्ध करवाएँ और भारतीय बंदरगाहों पर भीड़ भाड़ कम करने के लिए पाकिस्तानी बंदरगाहों का इस्तेमाल हो.












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