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सरकार अलगाववादियों को खुश करने में लगी है : सिन्हा

By Staff
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नई दिल्ली, 1 सितम्बर (आईएएनएस)। जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एस. के. सिन्हा ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह घाटी में अलगाववादियों को 'प्रसन्न' करने के लिए हद से पार जा रही है, जबकि उसे उनके इस 'बेतुके दुष्प्रचार' का माकूल जवाब देना चाहिए था कि अमरनाथ श्राइन बोर्ड को भूमि आंवटित करने से जम्मू कश्मीर का जनसांख्यिकीय स्वरूप बदल जाएगा।

नई दिल्ली, 1 सितम्बर (आईएएनएस)। जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एस. के. सिन्हा ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह घाटी में अलगाववादियों को 'प्रसन्न' करने के लिए हद से पार जा रही है, जबकि उसे उनके इस 'बेतुके दुष्प्रचार' का माकूल जवाब देना चाहिए था कि अमरनाथ श्राइन बोर्ड को भूमि आंवटित करने से जम्मू कश्मीर का जनसांख्यिकीय स्वरूप बदल जाएगा।

अपने आवास पर आईएएनएस को दिए विशेष साक्षात्कार में सिन्हा ने कहा,"हम घाटी में कट्टपंथियों और असहिष्णु ताकतों को बयानबाजी करते देख रहे हैं और केंद्र सरकार उन्हें रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही। दरअसल वह उन्हें खुश करने के लिए हद से बाहर जा रही है।" सिन्हा 25 जून को कार्यमुक्त होने के बाद से राजधानी में रह रहे हैं।

सिन्हा ने कहा,"जर्मनी के जोसेफ गोएबल्स की तरह वे अलगाववादी झूठ पर झूठ बोल रहे हैं और हम(सरकार) उस झूठ को गलत ठहराने की बजाए उन्हें बहलाने और उनके संरक्षण में लगे हैं।"

सिन्हा उन दिनों जम्मू कश्मीर के राज्यपाल और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के प्रमुख थे, जब सरकार ने मई में बोर्ड को 40 एकड़ भूमि देने का फैसला किया था।

सिन्हा ने कहा, "भूमि स्थानांतरित करने में मेरी कोई भूमिका नहीं थी। तीन साल से मंत्रिमंडल के पास फाइल लंबित पड़ी थी, ऐसे में भला मैं कैसे अनावश्यक दबाव डाल सकता था। कार्यकाल के आखिरी सप्ताह में कोई राज्यपाल भला कितना प्रभाव डालने की स्थिति में होता है।" सिन्हा इस सामान्य धारणा का जवाब दे रहे थे कि विवादास्पद कदम उठाकर उन्होंने राज्य में असंतोष पैदा किया।

सिन्हा ने कहा कि वनभूमि को लीज पर देने में कुछ भी अस्वाभाविक नहीं है। उन्होंने कहा कि रिलायंस को संचार टावर लगाने के लिए, बिजली विभाग को पारेषण लाइन बिछाने के लिए और शिक्षा विभाग को विश्वविद्यालय परिसर बनाने के लिए वन भूमि दी गई। उन्होंने कहा कि ये सभी जमीने उसी दिन दी गई थीं, जिस दिन श्रीअमरनाथ श्राइन बोर्ड को भूमि दी गई थी।

सिन्हा ने कहा कि उन्होंने अमरनाथ यात्रा की अवधि दो महीने तक बढ़ाने और उसकी सुरक्षा में इजाफा करने को कहा था। उन्होंने पलटकर जानना चाहा, "आखिर इसमें हर्ज क्या है।"

उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ रही थी और पर्यटन से अंतत: आर्थिक लाभ होता है। उन्होंने जानना चाहा कि क्या अजमेर शरीफ के जायरीनों की हर साल बढ़ती संख्या पर सवाल उठाया जाता है या फिर यह कहा जाता है कि बद्रीनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित कर दी जानी चाहिए?

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार संवेदनशील राज्य के साथ अतिरिक्त संवेदनशील हो रही है। उन्होंने कहा, "हम सैयद अली शाह गिलानी जैसे लोगों को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं, जो हो नहीं सकता। सरकार ने हालात से निपटने के लिए बेहद खराब तरीका अपनाया। जब अलगाववादियों ने आर्थिक नाकेबंदी की बात उठाई, तो सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की।"

उन्होंने कहा कि मीडिया ने ही नहीं, सरकार और राजनीतिक दलों ने भी बेतुके दुष्प्रचार से निपटने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें खुश करने में लगी रही। सिन्हा ने कहा कि इस विवाद को भड़काने में उनका कोई योगदान नहीं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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