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    उड़ीसा में नहीं थम रही हिंसा, गिरिजाघरों को फिर जलाया गया (लीड-1)

    By Staff
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    भुवनेश्वर/मुंबई/अहमदाबाद, 28 अगस्त (आईएएनएस)। उड़ीसा में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही। सूबे के कई इलाकों में गुरुवार को भी स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। उग्र भीड़ ने ईसाई समुदाय के कई घरों और गिरिजाघरों को आग के हवाले कर दिया।

    राज्य में हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में अब तक कम से कम 11 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य सरकार ने स्थिति पर काबू पाने के लिए ग्रामीण शांति समितियों का गठन किया है। इस बीच, राज्य में ईसाई समुदाय पर जारी हमले को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं।

    राज्य में सांप्रदायिक हिंसा की आग कंधमाल से अब अन्य जिलों में पहुंच गई है। हिंसाग्रस्त इलाकों की स्थिति इतनी गंभीर है कि राज्य सरकार ने गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और कांग्रेस के अन्य नेताओं को दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा करने की इजाजत नहीं दी।

    पुलिस के अनुसार कंधमाल के साथ-साथ अब बोलानगीर और केंद्रपाड़ा जिले में भी स्थिति तनावपूर्ण है। अधिकारियों के अनुसार केंद्रपाड़ा में कर्फ्यू लगा दिया गया है और बोलानगीर में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है।

    राज्य के पुलिस महानिदेशक गोपालचंद्र नंदा ने कहा, "कंधमाल से छिटपुट हिंसा की खबरें आईं हैं। वहीं बोलानगीर में भीड़ द्वारा एक गिरिजाघर को आग लगाने की सूचना मिली है।"

    कंधमाल के जिलाधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि राज्य में शांति स्थापित करने के लिए हमने दर्जनों ग्रामीण शांति समितियों का गठन किया है जिसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है।

    उधर मुंबई में उड़ीसा में भड़की साम्प्रदायिक हिंसा के विरोध में जाने माने फिल्म निर्माता व निर्देशक महेश भट्ट के नेतृत्व में विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल एस. सी. जमीर से भेंट की।

    उड़ीसा की घटनाओं की निंदा करते हुए इस प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि उड़ीसा में ईसाइयों के जान माल की रक्षा के लिए वह हस्तक्षेप करे।

    प्रतिनिधिमंडल ने उड़ीसा में जल्द से जल्द सेना की तैनाती की मांग की। साथ ही उसने पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की भी गुजारिश की।

    इस बीच, गुजरात के अहमदाबाद में राज्य के सामाजिक व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने उड़ीसा में फैली हिंसा के मद्देनजर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की।

    इन कार्यकर्ताओं ने उड़ीसा में फैली सांप्रदायिक हिंसा के सिलसिले में गुरुवार को यहां एक बैठक की। बैठक के बाद जारी किए गए एक संयुक्त बयान में पहले स्वामी लक्ष्मणानंद की हत्या की निंदा की गई और फिर उसके बाद वहां फैली हिंसा के दौरान ईसाई समुदाय को निशाना बनाए जाने की भी तीखी आलोचना की गई।

    बहरहाल, उड़ीसा की मौजूदा स्थिति को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य इकाई दो खेमों में बंट गई है। एक धड़ा राज्य सरकार से समर्थन वापसी की इच्छा रखता है। राज्य में बीजू जनता दल और भाजपा की गठबंधन सरकार है।

    भाजपा से बुधवार को इस्तीफा देने वाले विधायक बृंदाबन माझी ने गुरुवार को आईएएनएस को बताया कि विहिप नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती पर कई बार हमला हो चुका था। उनकी सुरक्षा को लेकर कई बार आवाज भी उठाई गई, लेकिन राज्य सरकार ने इसे लेकर कुछ नहीं किया।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा के कम से कम 15 विधायक, जिसमें तीन मंत्री भी शामिल हैं, राज्य सरकार से समर्थन वापस लेना चाहते हैं।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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