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काबुल धमाके में आईएसआई का हाथ होने से पाक का इंकार (लीड-2)

By Staff
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इस्लामाबाद/वाशिंगटन, 1 अगस्त (आईएएनएस)। काबुल में सात जुलाई को भारतीय दूतावास के बाहर हुए धमाके में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के हाथ होने की एक खबर पर पाकिस्तान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) का हाथ नहीं है।

अमेरिकी समाचर पत्र 'न्यूयार्क टाइम्स' ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा था कि उनके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि सात जुलाई को काबुल में हुए धमाके में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का हाथ था।

समाचार पत्र के एक अगस्त के अंक में इस संबंध में खबर प्रकाशित होने के बाद पाकिस्तान ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसे आधारहीन बताया। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद सादिक ने समाचार एजेंसी डीपीए को बताया कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से आधारहीन और मनगढंत है।

सादिक ने कहा कि इस रिपोर्ट से आईएसआई को बदनाम किया जा रहा है। पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया ठीक उस समय आई है जब कोलंबो में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) की बैठक में प्रधानमंत्री मनोमोहन सिंह और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के बीच बैठक होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

मनमोहन सिंह और गिलानी की कोलंबो में दक्षेस सम्मेलन के दौरान होने वाली बैठक में यह मुद्दा काफी प्रमुखता से उठने की संभावना है।

भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने नई दिल्ली में हुई पांचवें दौर की समग्र वार्ता के दौरान पाकिस्तानी विदेश सचिव के सम्मुख यह मुद्दा उठाया था।

यह रिपोर्ट अमेरिकी खुफिया अधिकारियों की बैठक में उनके द्वारा की गई टिप्पणियों पर आधारित है। इस बैठक में खुफिया अधिकारियों ने भारत के इस आरोप की पुष्टि की है कि काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए हमले का सूत्रधार आईएसआई का निदेशक है।

अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर न्यूयार्क टाइम्स को यह सूचना दी है। गौरतलब है कि काबुल में भारतीय दूतावास पर हमले में 54 लोगों की मौत हुई थी।

'न्यूयार्क टाइम्स' में शुक्रवार को प्रकाशित विवरण के अनुसार अमेरिका का निष्कर्ष पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों और हमलावरों के बीच संचार माध्यमों से हुई बातचीत पर आधारित है। इस बातचीत को काबुल विस्फोट से पहले अमेरिका द्वारा खुफिया रूप से सुना जा चुका था लेकिन बहुत कम जानकारी के कारण इसके लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई।

'न्यूयार्क टाइम्स' ने विदेश विभाग के एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से लिखा है कि गुप्त रूप से सुनी गई बातचीत से साफ साबित होता है कि अफगान आतंकवादियों के साथ इसमें पाकिस्तान खुफिया एजेंसी भी शामिल थी।

अखबार के अनुसार उस अधिकारी ने कहा, "इसकी पुष्टि में कुछ संदेह है लेकिन मुझे लगता है कि इसे काफी बड़ी पैमाने पर आयोजित किया गया है।"

भारतीय सुरक्षा सलाहकार एम.के.नारायणन ने बम हमले के तुरंत बाद इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने का आरोप लगाया था। लेकिन पाकिस्तान ने इस आरोप का खंडन कर दिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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