शाही लीची का स्वाद नहीं चख पाएंगे विदेशी

राज्य में हुई बे-मौसम बरसात और भीषण गर्मी ने शाही लीची (लाल लीची) का स्वाद ही बिगाड़ दिया है। राज्य के लीची निर्यातक राज कुमार केड़िया ने बताया कि अत्यधिक धूप की वजह से 40 प्रतिशत लीची बगानों में ही खराब हो गई या उसकी गुणवत्ता में कमी आई है। ऐसी स्थिति में विदेशों की छोड़ें! देश में भी मांग के अनुसार लीची की सप्लाई नहीं की जा सकेगी।
उन्होंने कहा, "वर्ष 2007 में 75 टन और वर्ष 2006 में 65 टन शाही लीची की विदेशों में आपूर्ति की गई थी लेकिन इस वर्ष आलम यह है कि एक लीची भी नहीं भेजी गई है। तेज धूप ने शाही लीची के रंग को काला कर दिया है। साथ ही रही सही कसर बे-मौसम बारिश ने पूरी कर दी है।"
लीची की खेती करने वाले कृष्णनंदन झा ने कहा, "उच्चगुणवत्ता वाली लीची की परिधि पांच से छह सेंटीमीटर होनी चाहिए। इस वर्ष हमलोग इस मानक के अनुसार लीची का उत्पादन नहीं कर पाए। यही वजह है कि लीची को बाहर नहीं भेजा जा रहा है। छोटे व मझौले लीची किसानों की स्थिति तो और भी बुरी है।"
उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष मौसम की बेरुखी के कारण किसानों को इस व्यापार में घाटा उठाना पड़ेगा। उधर लीची के खुदरा विक्रेता नंदलाल साह ने बताया कि प्रारंभ में तो लीची की बिक्री ठीक-ठाक थी परंतु अब इसकी बिक्री में शिथिलता आ गई है।
खैर! वजह जो भी हो शाही लीची ने वह आकार नहीं लिया कि उसे विदेश भेजा जा सके। ऐसे में विदेश में शाही लीची के इंतजार में बैठे दीवानों को इस वर्ष शाही लीची से महरूम रहना पड़ेगा क्योंकि वह खट्टी और छोटी रह गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस


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