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रक्षा महाकुंभ में अमरीकी हिस्सेदारी दुगनी हुई..चीन आया ही नहीं

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    नयी दिल्ली 12 फरवरी .वार्ता. तीस अरब डालर के सैन्य उपकरणों की खरीदारी करने जा रहे भारत की अब तक की सबसे बडी रक्षा प्रदर्शनी में अमरीका ने अपनी कम्पनियों की लम्बी कतार खडी कर दी है जबकि न्यौता दिए जाने के बावजूद चीन ने डैफएक्सपो 2008 में आना जरूरी नहीं समा1 भारतीय रक्षा कूटनीति की दशा दिशा और उसके बारे में अंतरराष्ट्रीय रूान का बयान कर रहे इस मेले में रूस की हिस्सेदारी का स्तर पिछली पांच प्रदर्शनियों के बराबर ही बना हुआ है जबकि पाकिस्तान को इसमें बुलाया ही नहीं गया1 यहां प्रगति मैदान में 16 से 19 फरवरी के बीच होने वाली पांच दिन की डैफएक्सपो 2008 प्रदर्शनी के पंडाल इस बार 32000 वर्ग मीटर में फैले हैं और क्षेत्र के हिसाब से भी अमरीकी कम्पनियों ने तकरीबन एक तिहायी जमीन हथियायी है1 दो साल पहले आयोजित हुए डैफएक्सपो 2006 में अमरीका की बीस कम्पनियां आयीं थीं. जिनकी संख्या इस साल प्रदर्शनी में 47 तक पहुंच गयी है1 देशों की हिस्सेदारी के हिसाब से यह प्रदर्शनी तीन गुना. और कम्पनियों की हिस्सेदारी के हिसाब से चार गुना बढ गयी है1 इस बार 273 विदेश रक्षा हथियार कम्पनियों समेत 475 कम्पनियां हिस्सा ले रही हैं जबकि घरेलू हिस्सेदारी पहली प्रदर्शनी से चार गुना बढकर 202 तक पहुंच गयी है1 रक्षा उत्पादन सचिव प्रदीप कुमार ने इस प्रदर्शनी का ब्योरा देते हुए यहां संवाददाता सम्मेलन में इस बात की पुष्टि की कि चीन को न्यौता दिया गया था लेकिन उसकी कोई कम्पनी इसमें नहीं आ रही है1 उन्होंने यह भी कहा कि मेले की आयोजक सीआईआई ने पाकिस्तान को इसमें आने का न्यौता नहीं दिया था1 अलबत्ता सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान में कोई महत्वपूर्ण रक्षा हथियार कम्पनी ही नहीं है लिहाजा उसे निमंत्रण देने का प्रश्न नहीं उठता था1 कौशिक समरेन्द्र अजय जगबीर1516वार्ता

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