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अंत:चेतना ही सभी समस्याओं का हल.. डा. कलाम

By Staff
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नई दिल्ली. 22 जनवरी. वार्ता. पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा है कि आत्मा की सत्ता को सुदृढ कर अंत:चेतना के सहारे विश्वव्यापी मामूली विवादों को आसानी से सुलाते हुये पूरी दुनिया में अमन चैन कायम किया जा सकता है

डा.कलाम ने आज यहां तिब्बती धर्म गुरू दलाई लामा और दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल विजय कपूर की मौजूदगी में मामूलीे विवादों को टालने के लिये सहिष्णुता के सिद्धान्त पर आधारित भारत के पारंपरिक तरीके को आगे बढाने संबन्धी विश्वव्यापी मुहिम की शुरूआत करते हुये यह बात कही1 उन्होंने अंत.चेतना को विकसित करने पर जोर देते हुये कहा कि आत्मानुभूति के आधार पर प्राप्त ज्ञान से आपसी हितों से जुडे मामूली विवादों को टाला जा सकता है1 डा.कलाम ने कहा अंत:चेतना से न सिर्फ विवादों को टाला जा सकता है बल्कि इसे विकसित करना सभ्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति का प्राथमिक दायित्व है1यूरोपीय संसद में दिये अपने संबोधन का उल्लेख करते हुये डा कलाम ने कहा कि अंत:चेतना विकसित करने के लिये मूल्यपरक शिक्षा पद्धति. धर्म को आध्यात्मिक ताकत में बदलने का माध्यम बनाना और गरीबी उन्मूलन तीन मूलभूत काम करना जरूरी है

इस अवसर पर मौजूद दलाईलामा ने कहा कि इस सदी के शुरू में विवादों को सुलाने के लिये हथियारों की मदद ली गयी और इसके फलस्वरूप 21 वीं सदी की शुरूआत खूनखराबे के साथ हुयी1दलाईलामा ने कहा..हमने पिछली सदी के अनुभव से सीख नहीं ली और इसका नतीजा छोटे से छोटे विवाद के नाम पर हथियारों के इस्तेमाल के रूप में सामने आया1 उन्होंने युद्ध को हिंसा का सबसे वीभत्स स्वरूप करार देते हुये कहा कि इस बुराई से बचने के लिये सहिष्णुता और सहनशीलता संबन्धी भारतीय दर्शन की शिक्षाओं को इस मुहिम के जरिये आगे बढाया जायेगा

निर्मल संजीव समरेनद्र लखमी1917वार्ता

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