आखिरी वक्त में क्या सोचती थीं बेनज़ीर
कई सालों बाद बेनजीर की पाकिस्तान वापसी के बाद कराची में पत्रकार अल्ताफ हुसैन ने उनसे कई मुद्दों पर लंबी बातचीत की. संभवतः अपने इस अंतिम साक्षात्कार में उन्होंने परवेज मुशर्रफ, पाकिस्तान के मौजूदा हालात तथा कश्मीर समस्या पर अपने विचार रखे. इन मुद्दों पर क्या सोच रखती थीं बेनज़ीर, इस इंटरव्यू की कुछ झलकियां-
मुशर्रफ ने जो सही किया हम उसका समर्थन भी करते हैं...
अपने आखिरी साक्षात्कारों में बेनजीर ने मुशर्रफ की नीतियों पर बेबाक टिप्पणी करते हुए कहा थाः जनरल मुर्शरफ ने मुझे आश्वस्त किया है कि संसद के पास सभी अधिकार हैं और उन्हें अपने लिए सत्ता नहीं चाहिए. एक बात बहुत साफ है कि हम पीपीपी के लिए यह संभव नहीं है कि वह जनरल मुशर्रफ के मामले में पूर्णतः स्वीकार या पूर्णतः अस्वीकार की नीति अख्तियार करे. उनकी कई नीतियों की हम आलोचना भी करते हैं और जहां उन्होंने सही किया है, हम उनका समर्थन भी करते हैं.
हमें लोकतंत्र चाहिए
पाकिस्तान में लोकतंत्र के मुद्दे पर बेनजीर ने कहा थाः हम दोनों की राय है कि देश में चुनाव के लिए सुधारवादी कार्यों का क्रियान्वयन होना चाहिए. हालांकि कई मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई है. खास तौर पर लोकतांत्रिक मुद्दों को लेकर हमारे बीच कुछ असहमतियां हैं.
हम कट्टरपंथियों के खिलाफ हैं
बेनजीर ने अपने अंतिम साक्षात्कारों में साफ तौर पर कट्टरपंथियों की मुखालफत की थी और कहा थाः अलकायदा समेत कई संगठनों के बड़े कट्टरपंथियों की पाकिस्तान में गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि देश में इनकी जड़ें पिछले कुछ सालों में बहुत मजबूत हुई हैं. इन संगठनों ने देश और देश से बाहर पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाने का काम किया है.
कश्मीर मामले में युद्ध जरूरी तो नहीं...
कश्मीर मुद्दे पर बेनजीर ने कहाः यह मामला पाकिस्तान और भारत के लिए एक ऐसा मुद्दा है, जिसे लगातार उलझाने की कोशिश हुई है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसके लिए युद्ध का रास्ता अख्तियार कर लें.
साभारः raviwar.com












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