IAS Taruni Pandey: चार महीने तैयारी कर बिना कोचिंग तरुणी पांडेय बनीं IAS, एक हादसे ने बदल दी पूरी जिंदगी
IAS Taruni Pandey Success Story: जिन्हें खुद पर विश्वास होता है, उन्हीं की जिंदगी में कुछ खास होता है, सपनों को हकीकत में बदलने का जज़्बा रखो, हर मुश्किल रास्ता भी आसान होता है। कुछ ऐसी ही सोच आईएएस अधिकारी तरुणी पांडेय की है। साधारण मध्यम परिवार में जन्मीं तरुणी पांडेय सफलता की कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली तरुणी पांडेय ने कड़ी मेहनत और लगन से मेडिकल परीक्षा क्रेक कर भी ली और एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू कर रहीं थीे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। इनकी जिंदगी में एक के बाद एक ऐसी कठिन परीक्षा की घड़ी आई कि डॉक्टर बनने का सपना चकनाचूर हो गया लेकिन तरुणी पांडेय ने हार नहीं मानी। एक बड़े हादसे से सबक लेते हुए तरुणी ने आईएएस बनने की ठान ली और महज चार महीने की तैयारी में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की और आईएएस अधिकारी बन गईं।

डॉक्टर बनना चाहती थीं तरुणी पांडेय
पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में जन्मी तरुणी पांडेय ने अपना पूरा बचपन झारखंड के जामताड़ा में बिताया। जामताड़ा के मध्यवर्गीय परिवार की बेटी तरुणी पांडेय के घर में सीमित संसाधन थे। जब तरूणी 10वीं पास हुईं तो परिवार की आर्थिक तंगी के कारण उन्हें जामताड़ा के एक सरकारी स्कूल में एडमिशन लेना पड़ा।
MBBS की पढ़ाई क्यों नहीं पूर कर सकीं तरुणी पांडेय?
पढ़ने में हमेशा अव्वल रहने वाली तरुणी पांडेय को 12वीं पास होते ही सिक्किम मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन मिल गया। एमबीबीएस सेकेंड इयर की पढ़ाई के दौरान तरुणी को मलेरिया, डेंगू और टॉयफाइड हो गया, इसके बाद वो फिसल कर गिर गई जिससे पैर टूट गया। लंबी बीमारी के चलते चलते उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और घर वापस लौटना पड़ा।

हादसे से तरुणी को मिली IAS बनने की प्रेरणा
एमबीबीएस की पढ़ाई छूटने के बाद तरुणी ने हार नहीं मानी और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNU) से ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की। पढ़ाई के दौरान 2026 में तरुणी की बड़ी बहन के पति, जो सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट थे, श्रीनगर में शहीद हो गए।
इस हादसे ने पूरे परिवार को अंदर से तोड़ दिया। अपनी बहन को सरकारी नौकरी उनके पति की जगह दिलवाने के लिए तरुणी कई अधिकारियों से मिलीं, जिससे उन्हें एक आईएएस अधिकारी की जिम्मेदारियों और शक्तियों का एहसास हुआ। इसी अनुभव ने उन्हें सिविल सेवा में जाने का फैसला लेने के लिए प्रेरित किया।

बिना कोचिंग के UPSC में सफलता
तरुणी पांडे ने स्कूल और कॉलेज के दौरान कभी कोचिंग नहीं ली और हमेशा सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया। उन्होंने यूपीएससी की तैयारी भी बिना किसी कोचिंग सेंटर के करने का निर्णय लिया। लेकिन इनके पास पहला और अंतिम प्रयास बचा था क्योंकि आयु सीमा के कारण इसके बाद वे परीक्षा नहीं दे सकती थीं। 2020 में कोविड होने की वजह से वे परीक्षा नहीं दे सकीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और यूट्यूब वीडियो, नोट्स और किताबों की मदद से अपनी तैयारी जारी रखी।
पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 14
लगातार एकाग्रता के साथ पढ़ाई करने के बाद तरुणी ने 2021 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में शानदार सफलता हासिल की। उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 14वीं रैंक प्राप्त कर आईएएस कैडर हासिल किया, जो उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम था।
रिजल्ट वाले दिन का भावुक पल
तरुणी ने सोशल मीडिया पर रिजल्ट वाले दिन की यादें साझा करते हुए बताया जब मेरी मां घर आईं तो मैंने तब सभी को खुशखबरी दी। ये खुशखबरी सुनकर सभी भावुक होग गए और मेरे भाई को विश्वास नहीं हो रहा था, मां खुशी से नाच रही थीं और पिता भावुक होकर रो पड़े।
तरुणी पांडेय की वर्तमान पोस्टिंग कहां हैं?
वर्तमान में तरुणी पांडे दिल्ली में संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत भारतीय संचार वित्त सेवा (IP&TAFS) में ग्रुप-A अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।












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