दो IPS बेटियां बनीं मिसाल: एक ने RPF DG बन बदला 143 साल का इतिहास, दूसरी के हाथ में CISF की कमान

Women IPS Officers motivational story: जब एक नहीं, दो बेटियों ने खाकी वर्दी पहन देश की सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी, तो ये महज़ एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं बल्कि नारी शक्ति की जीवंत मिसाल है। एक IPS ने 143 साल पुराने सिस्टम में इतिहास रच दिया, तो दूसरी ने बहुचर्चित ऑपरेशनों से लेकर केंद्रीय जिम्मेदारी तक अपनी अलग पहचान बनाई है। ये हैं भारत की दो जांबाज़ आईपीएस अधिकारी सोनाली मिश्रा और बिनीता ठाकुर।

इनकी वर्दी महज़ पहनावा नहीं, भरोसे और नेतृत्व का प्रतीक है। इन्होंने साबित कर दिया कि बदलाव सिर्फ नीतियों से नहीं, इरादों से आता है और जब इरादों की कमान बेटियों के हाथ हो, तो इतिहास खुद को दोहराने नहीं, नया लिखने आता है।

Women IPS Officers motivational story

IPS सोनाली मिश्रा: 143 साल पुरानी व्यवस्था में पहली महिला मुखिया

मध्य प्रदेश कैडर की 1993 बैच की आईपीएस अधिकारी सोनाली मिश्रा ने हाल ही में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की महानिदेशक के तौर पर कार्यभार संभाला है। यह केवल एक नियुक्ति नहीं है, बल्कि 143 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी महिला अधिकारी को यह ज़िम्मेदारी दी गई है।

तीन दशकों के सेवा अनुभव के दौरान सोनाली मिश्रा ने CBI से लेकर BSF तक और संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन तक अपनी काबिलियत का परचम लहराया है। उनकी नेतृत्व क्षमता का एक उदाहरण मई 2025 में भोपाल में आयोजित महिला सशक्तिकरण सम्मेलन है, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा का नेतृत्व किया और इस जिम्मेदारी को भी वह बखूबी निभा गईं।

बिलासपुर जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक उन्होंने ये साबित कर दिखाया कि "लोहा सिर्फ हथियारों से नहीं, हौसलों से भी मनवाया जाता है।"

बिनीता ठाकुर: डकैतों से लेकर ड्रग माफिया तक, अब केंद्रीय जिम्मेदारी

राजस्थान कैडर की 1996 बैच की आईपीएस अधिकारी बिनीता ठाकुर को हाल ही में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के पद पर नियुक्त किया गया है। तेज-तर्रार और अनुशासित अधिकारी के रूप में उनकी पहचान सिर्फ प्रशंसा की बात नहीं, बल्कि ठोस कार्यों का नतीजा है।

करौली में डकैतों के गिरोहों का सफाया हो या श्रीगंगानगर में अंतरराष्ट्रीय हथियार लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़- ठाकुर ने हर चुनौती को न सिर्फ स्वीकारा, बल्कि रणनीति और साहस के दम पर जीत भी दर्ज की। किसान आंदोलनों में संतुलन बनाए रखना हो या अपराधी गिरोहों के नेटवर्क तोड़ना। उन्होंने दिखाया कि महिला नेतृत्व सिर्फ 'सॉफ्ट पावर' नहीं, 'स्ट्रेटेजिक पॉवर' भी होता है।

वर्दी से परे एक संदेश

सोनाली मिश्रा और बिनीता ठाकुर दोनों अलग-अलग राज्यों, बैच और पृष्ठभूमियों से आती हैं। लेकिन इनका साझा सूत्र है साहस, सेवा और सिस्टम को बेहतर करने का संकल्प। ये सिर्फ कानून की रक्षक नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक रास्ता हैं।

इनकी कहानियां बताती हैं कि जहां एक तरफ महिलाएं स्पेस मिशन और स्टार्टअप्स में कमाल कर रही हैं, वहीं सुरक्षा बलों में भी उनका नेतृत्व अब ऐतिहासिक बन रहा है। देश को चाहिए ऐसी ही प्रेरणाएं, जो यह साबित करती हैं कि "अगर इरादे मजबूत हों, तो वर्दी सिर्फ पहनने की चीज़ नहीं, बदलाव का माध्यम बन जाती है।

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