Rippy kumari Kota: वो बहन जो बनी भाई की रक्षक, पिता की मौत के बाद संभाली खेती, चलाने लगी ट्रैक्टर
Rippy kumari motivational story Kota: रक्षाबंधन 2023 के मौके पर जानिए कोटा के गांव प्रेमपुरा की रिप्पी कुमारी की कहानी, जिसने पिता दर्शन सिंह की मौत के बाद भाई सतपाल सिंह-बहन करणजीत को संभाला।
Rippy kumari Success Story Kota: राजस्थान के कोटा जिले के गांव प्रेमपुरा के लोग युवती रिप्पी कुमारी को ट्रैक्टर दौड़ाता देख अचंभित नहीं होते, क्योंकि ये जानते हैं कि रिप्पी कुमारी ने पिता की मौत के बाद घर-खेती संभाल रखी है। घर से खेत और खेत से मंडी तक ट्रैक्टर दौड़ाते अक्सर नजर आती हैं।

आज देशभर में रक्षाबंधन पर्व मनाया जा रहा है। बहनें अपने भाइयों को राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना कर रहे हैं। वहीं, रिप्पी सिंह तो भाई की खुशहाली के लिए दुआ भी कर रही और उसकी रक्षक की भूमिका भी निभा रही हैं।
मूल रूप से श्रीगंगानगर के रहने वाले
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में 37 वर्षीय रिप्पी कुमारी कहती हैं कि वे राजस्थान के कोटा जिले की दीगोद तहसील के गांव प्रेमपुरा में रहती हैं। मूल जड़ें श्रीगंगानगर जिले में हैं। साल 1963-64 में गांधी सागर बांध कोटा से नहर निकली तो पिता दर्शन सिंह प्रेमपुरा गांव आ गए थे। 30 बीघा जमीन खरीदकर खेती करने लगे।

रिप्पी कुमारी के पास एमएससी आईटी की डिग्री
रिप्पी कुमारी के बड़े भाई सतपाल सिंह व छोटी बहन करणजीत हैं, जो कोटा की एक कंपनी में जॉब करती है। भाई की शादी हो चुकी है। दोनों बहनें अविवाहित हैं। मां सुखदेव कौर हाउस वाइफ हैं। रिप्पी ने MSc IT की डिग्री ले रखी है।
साल 2007 में पिता का निधन
रिप्पी कुमारी के खेत प्रेमपुरा से करीब 8 किलोमीटर दूर गांव धौरी जनकपुर में हैं। साल 2007 तक सब कुछ ठीक चल रहा था। पिता खेतों की देखभाल करते थे। उनका हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया था तो परिवार की सारी जिम्मेदारी रिप्पी के भाई सतपाल सिंह के कंधों पर आ गई।
भाई के कंधों से कम की जिम्मेदारी
रिप्पी कहती हैं कि पिता की मौत के बाद खेतों में मजदूर ले जाना, हकाई, जुताई, कटाई करना और फसल को मंडी तक पहुंचाना अकेले भाई को करना पड़ रहा था। ऐसे में रिप्पी ने फैसला लिया कि वे भाई के कंधों से जिम्मेदारियों का बोझ कम करेंगी। ये सारे काम वो खुद करेंगी।

कोटा भामाशाह मंडी ले जाती उपज
रिप्पी कुमारी ने सबसे पहले अपने पिता का ट्रैक्टर चलाना सीखा और फिर खेती के गुर भी। अब खेतों में सोयाबिन, उड़द की दाल व धान की खेती करती हैं। आंवले का बगीचा भी संभाल रही हैं। उपज को बेचने के लिए कोटा की भामाशाह मंडी में भी ट्रैक्टर से रिप्पी ही जाती हैं।
अब नहीं करूंगी शादी
रिप्पी कहती हैं कि पिता की मौत के बाद सबको लगता था कि अब हमारा परिवार जमीन बेचकर यहां से वापस श्रीगंगानगर चला जाएगा, मगर मैं और भाई ने मिलकर सब कुछ अच्छे से संभाल लिया। अब तो यह भी तय किया है कि मैं कभी शादी नहीं करूंगी।












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