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Jyotsna Kagal: उम्र को मात देती हैं ज्योत्सना, 74 वर्ष में साइकिल से सफर, रिटायरमेंट के बाद भी 'सेवा'

हिम्मत सबसे बड़ी ताकत है जिससे बड़े से बड़े संकल्प पूरे होते हैं। कर्नाटक की एक ऐसे ही जज्बे वाली 74 वर्षीय लेडी खुद में बड़ी प्रेरणा है।

Jyotsna Kagal Riding Bicycle in Saree

Old Lady motivational story: ज्योत्सना कागल (Jyotsna Kagal) कर्नाटक की वो महिला हैं, जिनकी उम्र अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है। लेकिन अपने कार्य के प्रति लगन और निष्ठा ने उन्हें एक कर्म योगिनी बना दिया है। उनका जीवन आज की युवतियों और समाज के सभी वर्गों के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है। ज्योत्सना में आलस्य जरा भी नहीं है। रिटायरमेंट हुए डेढ़ दशक होने को लेकिन वो आज समाज और जीविकोपर्जन के लिए सेवाएं दे रही हैं। वो एक पूर्व फौजी की पत्नी हैं, लेकिन जीवन में ऐश और आराम की दुनिया से दूर खुद को व्यस्त रखना उन्हें आनंद आता है। आइए जानते हैं के कर्नाटक की लेडी ज्योत्सना कैसे समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं...

14 वर्ष से साइकिल का शौक
उत्तर कन्नड़ में गोकर्ण के बांकीकोडला गांव में ज्योत्सना कागल का जन्म हुआ। वे गांव में ही पली-बढ़ी। ज्योत्सना को बचपन से ही साइकिल चलाने का शौक था। 14 साल की उम्र में उन्होंने अपने पड़ोसियों से साइकिल मांगकर चलाना सीख लिया था। आगे भी ज्योत्सना का साकिलिंग (Riding Bicycle in Saree) के प्रति लगाव बना रहा।

'साइकिलिंग ने रखा स्वस्थ'
ज्योत्सना के आंगनबाड़ी से रिटायरमेंट के डेढ़ दशक होने को हैं, लेकिन उन्होंने अब भी साइकिल चलाना नहीं छोड़ा। अगर उनकी उम्र की बात करें तो वो 74 वर्ष हो चुकी है। लेकिन वो अब भी साइकिल चलाती हैं। ज्योत्सना ने साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। शख्स जीवन के किसी भी पड़ाव में अपने शौक पूर कर सकता है। लेकिन इसके लिए स्वस्थ होना पहली शर्त है, जो कि ज्योत्सना भलीभांति पूरा करती हैं।

आर्मी मैन से हुई थी शादी
दरअसल, ज्योत्सना की शादी एक आर्मी मैन हुई। ज्योत्सना भी आंगनवाड़ी में कार्यरत थीं। अब वो रिटायर्ड हैं। उनका बेटा स्कूल टीचर है। ज्योत्सना का साकिलिंग के प्रति प्यार केवल अब नहीं बल्कि शादी के बाद भी कायम रहा। उन्होंने साइकिल चलाना कभी नहीं छोड़ा। वे कहती हैं कि मेरी साइकिल ने मुझे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से दूर रखा है।

पिग्मी डिपॉजिट कलेक्टर का काम
रिटायरमेंट के बाद भी ज्योत्सना काफी एक्टिव रहती हैं। वे अब पिग्मी डिपॉजिट कलेक्टर के रूप में काम करती हैं। उनके दिन की शुरुआत योगा और ध्यान से होती है। इसके बाद वे अपने खेत में कुछ काम करती हैं। जिसके बाद ज्योत्सना अपनी साइकिल से लोगों के घर जाकर उन्हें भविष्य के लिए धन जुटाने की सलाह देतीं हैं। वे लोगों को पिग्मी डिपॉजिट के लिए प्रेरित करती हैं। यही नहीं अपनी कर्मठता के कारण ज्योत्सना नौ वर्षों तक गोकर्ण में महाबलेश्वर सहकारी समिति की पहली महिला अध्यक्ष भी रहीं।

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