Exclusive: उदयपुर की रिया ने इंटरनेशनल स्पेट्रम 2023 में किया कमाल, कहा-'बेहतर से बेहतरीन होने का प्रयास '
Riya Vaishnav: अपनी गंभीर पेटिंग्स से लोगों को अचरज में डालने वाली 11वीं में पढ़ने वाली कलाकार रिया वैष्णव ने कहा कि 'कड़ी मेहनत से जो भी काम कीजिए उसमें सफलता जरूर मिलती है।'

Riya Vaishnav Exclusive Interview: कहते हैं कि कैनवस पर भावनाओं के ब्रश चलते हैं तो जो तस्वीर उभरती है, वो अनुपम, अलौकिक और हमेशा दुनिया की भीड़ से अलग होती है और ऐसी ही तस्वीरें बनाती हैं राजस्थान की 16 वर्षीय छात्रा रिया वैष्णव, जिनकी कलाकारी आपके दिल-दिमाग पर एक अलग पहचान छोड़ती है। खूबसूरत रंगों से कैनवस में एक जान फूंकने वाली रिया वैष्णव ने बहुत ही कम उम्र में ही सफलता का स्वाद चख लिया है और वो अपने इस हूनर की वजह से काफी चर्चित हो गई हैं।
उदयपुर के महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल में 11वीं क्लास में पढ़ने वाली रिया ने दस से ज्यादा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खिताब अपने नाम कर लिए हैं, यही नहीं गोवा में आयोजित इंटरनेशनल स्पेट्रम 2023 कला प्रदर्शनी में उन्हें मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है तो वहीं हाल ही में रिया की पेटिंग्स को 'मुंबई आर्ट फेयर' में भी जगह दी गई है।
रिया ने वनइंडियाहिंदी से खास बातचीत में अपने सपनों और अपने अब तक के सफर के बारे में खुलकर बातचीत की। रिया भले ही उम्र में छोटी हैं लेकिन उनके ख्वाब उनकी तरह से ही बेहद मासूम लेकिन ऊंचे हैं। अपने मां-पिता की लाडली रिया ने मुस्कुराते हुए कहा कि 'जब उनके पापा ने उन्हें कलर्स लाकर दिए थे तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वो अपनी पेटिंग्स की वजह से ही घर-घर में जानी जाएंगी। रिया ने कहा कि जब लोग उनकी तारीफ करते हैं तो उन्हें बहुत खुशी होती है, स्कूल में उनके जूनियर्स उनसे हमेशा कहते हैं कि 'रिया दीदी मुझे भी पेटिंग्स सिखा दो ना।'

रिया ने कहा कि 'उन्हें ये हूनर अपने पापा धर्मेश वैष्णव से मिला है, बता दें कि उनके पापा भी अच्छे चित्रकार हैं। रिया की मां ममता वैरागी एक ब्यूटीशियन हैं। रिया दोनों की इकलौती संतान हैं। रिया ने बताया कि 'लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपनी पेटिंग्स पर पूरी तरह से फोकस करने का मौका मिला और इसी का नतीजा है कि आज बहुत सारे पुरस्कार उनकी झोली में आ गए। पढ़ाई के दौरान कैसे अपनी पेटिंग्स करती हैं? इस सवाल के जवाब में रिया ने बड़ा ही प्यारा सा उत्तर दिया कि 'जो काम आपको सुकून दें, वो आप कर ही लेते हैं। पढ़ाई और पेटिंग्स दोनों ही जरूरी है इसलिए दोनों के लिए वक्त अपने आप निकल जाता है।'
आम बच्चों की तरह ही रिया भी अपने पूरे दिन को एक टफ टाइम टेबिल के तहत मैनेज करती हैं, जिसमें उनके मम्मी-पापा उनका पूरा साथ देते हैं। उनका पढ़ने और पेटिंग्स का टाइम फिक्स हैं। रिया ने कहा कि 'एक बात उन्होंने अपने पैरेंटस से सिखी है और वो है अनुशासन, जब आप एक नियम बद्ध तरीके से अपना काम करते हैं तो कोई भी चीज मुश्किल नहीं होती है और मैं वो ही करने की कोशिश कर रही हूं। फिलहाल अभी तो शुरुआत है।' रिया पेटिंग्स की ही दुनिया में नाम कमाना चाहती हैं। उन्हें नेचर काफी आकर्षित करता है और ये बात उनकी तस्वीरों में भी दिखाई पड़ती है।
मुंबई आर्ट फेयर की बात करते हुए रिया ने कहा कि 'वहां पर बहुत बड़े आर्टिस्ट थे, जिनकी तस्वीरों पर डॉ जसपिंदर नरूला, डॉ सोमा घोष, लेस्ली लुईस, अनुराधा पौडवाल, पंडित जीतू शंकर, राजेंद्र, काव्या जोन्स जैसी लोकप्रिय हस्तियां कमेंट कर रहे थे। जब इन लोगों ने मेरी तस्वीरों को सराहा तो मुझे बहुत अच्छा लगा, मेरे लिए तो ये किसी सपने की तरह था। रिया ने कहा कि 'वो बेहतर से बेहतरीन काम करना चाहती हैं और अपनी तस्वीरों के जरिए आर्ट की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहती हैं।'

रिया उदयपुर जैसे खूबसूरत शहर में रहती हैं, जिसे कुदरत ने दोनों हाथों से संवारा है, रिया ने कहा कि 'उन्हें प्रकृति से बेहद प्रेम है और शायद इसलिए मेरे चित्रों में इनका प्रभाव दिखता है। रिया आज लाखों-करोंड़ों बच्चों के लिए मिसाल बन गई हैं। उन्होंने कहा कि 'मैं यहां तक अगर पहुंची हूं तो सिर्फ इसलिए कि मेरे मम्मी-पापा ने मेरे सपनों को समझा है, मैं दुनिया के हर मां-पिता से यही निवेदन करती हूं कि वो भी अपने बच्चों के सपने और ख्वाहिशों को समझें और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दें क्योंकि जिंदगी उस वक्त और खूबसूरत और आसान हो जाती है, जब लोगों को अपनों का साथ और प्यार मिलता है।'












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