कैंटीन में खाते हैं ये जज साहब, कॉरपोरेट ऑफिस में बदल दिया कोर्ट

नई दिल्ली। ऑफिस टाइम में मोबाइल फोन पर प्रतिबंधित, वर्किंग डेस्क पर लंच करने पर प्रतिबंध, ऑफिस में तेज आवाज में बात करने पर रोक और कैंटीन में हल्की आवाज में बजता मधुर संगीत किसी कॉर्पोरेट ऑफिस का हाल नहीं बल्कि अहमदाबाद सिटी कोर्ट का नजारा है। यह सभी बदलाव कर्मचारियों की क्षमता को बढ़ाना के लिए किए गए हैं। जब से न्यायाधीश एमके दवे नें अहमदाबाद के सिटी सिविल और सेशन कोर्ट मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला है। तब से कोर्ट का माहौल ही बदल गया है। वहीं बाहरी व्यक्तियों के लिए कुछ नियम लागू किए गए हैं।

कोर्ट

अहमदाबाद मिरर में छपी खबर के मुताबिक, कोर्ट में हाल ही में किए इन बदलावों से कई सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। कोर्ट ने दो महीनों में लंबित पड़े 15 सौ से अधिक केसों का निस्तारण किया था। दवे के चार्ज लेने से पहले लगभग 1600 आवेदन लंबित पड़े हुए थे। इनकी संख्या घटकर अब 490 रह गई है। कोर्ट के स्टाफ और वकीलों के मुताबिक यह परिवर्तन इच्छानुसार अनुपालन का परिणाम है। इसके लिए किसी को मजबूर नहीं किया गया है।

इस सब की शुरुआत इस साल जनवरी से शुरू हुई जब सिटी सेशन कोर्ट के जज पीबी देसाई रिटायर हुए और उनकी जगह पर पाटन के जिला और सेशन जज एमके दवे को नियुक्त किया गया। पदभार संभालते ही उन्होंने स्टाफ के लिए नियम जारी किए। ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन रखना सख्त मना है। इसके अलावा कोर्ट में गंदगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दवे कोर्ट में कर्मचारियों के उपस्थिति पर भी नजर ऱख रहे हैं। वहीं भोजन के लिए कैंटीन शुरू की गई है। जिसमें अलग-अलग विभागों के स्टाफ के लिए स्लॉट दिए गए हैं।

चीफ पब्लिक प्रोसिक्यूटर सुधीर ब्रह्मभट्ट ने बताया कि, न्यायाधीश दवे के अनुशासन से कोर्ट में कई चीजें बदली हैं। उनके आने के बाद से केस की बैकलॉग कम हुईं हैं। उन्होंने कुछ सकारात्मक बदलाव किए है। जैसे कोर्ट में कैंटीन की शुरुआत करना। इससे कर्मचारियों और वकीलो को काफी फायदा हुआ है। इसके अलावा न्यायाधीश दवे रोज 10:05 बजे कोर्ट पहुंच जाते है। इसके चलते पूरा स्टाफ भी समय पर कोर्ट पहुंता है। वह कोर्ट में हर छोटी-बड़ी चीज पर नजर ऱखते है।

न्यायाधीश में कोर्ट ऑफिस में टूटी हुई कुर्सियों , अनुपयोगी टेलीफोन जैसी कई चीजों को हटवाकर नई चेयर्स आदि को लगवाया है। वह रोजाना हर कोर्ट के हर विभाग का दौरा करते हैं औऱ उनकी समस्या को पूछते हैं । इसके आलावा कोई कर्मचारी अगर किसी मुसीबत में है तो वह अपने स्टाफ के माध्यम से उसे सहायता मुहैया कराते हैं। इसके अलावा उन्होंने कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर कभी कई काम किए है। जैसे समय-समय हेल्थ चैकअप कैंप जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।

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