Bhagyashree Saini: ये हैं राजस्थान की 'एजुकेशन गर्ल', Unsung Stars Campaign से संवारी 3600 बेटियों की जिंदगी
Unsung Stars Abhiyaan Rajasthan: ड्रॉपआउट बेटियों के लिए अनसंग स्टार्स अभियान चला रही Bhagyashree Saini राजस्थान के नीमकाथाना जिले के खेतड़ी उपखंड के गांव गोठड़ा की रहने वाली हैं।
Bhagyashree Saini Unicef Blogger: इन बेटियों के स्कूलों की ओर बढ़ते कदम रुक गए थे। जिंदगी चूल्हा-चौका तक ही सीमित हो गई थी। जबकि ये पढ़ना चाहती थीं, मगर कोई राह नजर नहीं आ रही थी।
कुछ के घरवाले तो बस चाहते थे कि इनके 'हाथ पीले' कर दिए जाएं और ज्यादातर घरवालों की मंशा यही थी कि इन्हें आगे नहीं पढ़ने दिया जाए। जब इन बेटियों के बारे में एक छोटे से गांव की बेटी भाग्यश्री सैनी को पता चला तो उसने बड़ा फैसला लेते देर नहीं लगाई।

अनसंग स्टार्स अभियान राजस्थान
भाग्यश्री सैनी ने इन 'गुमनाम सितारों' को फिर से चमकने का मौका देने के लिए Unsung Stars Abhiyaan Rajasthan लॉन्च कर दिया। नतीजा यह रहा कि 100-200 नहीं बल्कि 3600 ऐसी बेटियों का भाग्य बदल गया, जिन पर स्कूल ड्रॉपआउट का टैग लगा था। इन बेटियों ने फिर से किताबें उठाईं। ऑनलाइन पढ़ाई भी की। इनका पढ़ना-लिखना अब भी जारी है और आज ये पढ़-लिखकर कुछ बनने का ख्वाब संजो रही हैं।

एक्टिविस्ट भाग्यश्री सैनी का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में वुमन एंड चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट भाग्यश्री ने बताया कि फिलहाल अनसंग स्टार्स अभियान राजस्थान के छह जिलों बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, जालौर, अजमेर, जयपुर में चल रहा है। अभियान का दायरा बढ़ाया जाएगा। पूरे राजस्थान के साथ-साथ अन्य राज्यों को कवर करने की योजना है। एक गांव को 'राजस्थान अनसंग स्टार विलेज' के रूप में गोद लेने का भी लक्ष्य है।
एजुकेशन गर्ल भाग्यश्री सैनी
भाग्यश्री सैनी कहती हैं कि राजस्थान अनसंग स्टार्स अभियान के तहत काम करते हुए मैंने महसूस किया कि इन बच्चियों ने घर-परिवार की विपरीत परिस्थितियों की वजह से पढ़ाई बीच में छोड़ी। फिर जब दुबारा पढ़ने का मौका मिला तो इनका उत्साह देखते बना। शायद यही वजह मुझे राजस्थान की 'एजुकेशन गर्ल' व 'दंगल गर्ल' नाम से भी पहचान मिली।

अनसंग स्टार्स अभियान कब-कैसे शुरू हुआ?
साल 2019 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एक कोर्स के दौरान भाग्यश्री सैनी को एक असाइनमेंट के चलते जयपुर के ईदगाह, लंकापुरी और रामगंज इलाके में 146 ऐसी बेटियों से मुलाकात का अवसर मिला, जिनकी पढ़ाई बीच में छूट चुकी थी। भाग्यश्री ने इनको दसवीं बोर्ड के लिए ऑनलाइन पढ़ाना शुरू किया। इन्होंने परीक्षा पास करने के बाद आगे की पढ़ाई भी पूरी की। तब लगा कि प्रदेश में ना जानें ऐसी कितनी ही और बेटियां होंगी? उन सबके लिए 8 मार्च 2020 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से अनसंग स्टार्स अभियान शुरू कर दिया।

अनसंग स्टार्स अभियान की टीम
भाग्यश्री ने बताया कि बेटियों का 'भाग्य' बदलने के लिए उनके साथ अनसंग स्टार्स अभियान संयोजक स्वप्निल स्वाभाविक, मुख्य मैनेजमेंट टीम के अलावा एडवोकेट, डॉक्टर्स, टीचर्स, समाजसेवक व अन्य क्षेत्रों के भी कई लोग जुड़े हुए हैं। ड्रॉपआउट बेटियों के बारे में पता लगाने के लिए मॉबलाइजेशन का कार्य प्रथम संस्था के माध्यम से होता है। इन बच्चियों को राजस्थान ओपन बोर्ड से दसवीं बोर्ड की परीक्षा की तैयारी करवाई जा रही है। समय-समय पर अनसंग स्टार्स स्कॉलरशिप भी प्रदान की जाती है।
काम को मिला सम्मान
भाग्यश्री का मानना है कि उनके काम का सबसे बड़ा सम्मान ये ही है कि प्रदेश की 3600 बच्चियों को अब कोई ड्रॉपआउट नहीं कह सकता। अधिकतर ग्रेजुएशन कर रही हैं। इसके अलावा हाल ही वर्ल्ड वुमन लीडरशिप कांग्रेस व CMO एशिया द्वारा ग्लोबल वूमेन अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सराहनीय महिला सशक्तिकरण पर आधारित टीवी सीरियल 'मुस्कान' के चार एपिसोड में इनको फीचर किया गया। ग्लोबल हीरोज मैगजीन अमेरिका व Women Being मैगजीन यूके ने भी इनके बारे में लिखा।

भाग्यश्री सैनी का जीवन परिचय
- वर्तमान में जयपुर में रह रहीं भाग्यश्री मूलरूप से नीमकाथाना जिले के खेतड़ी उपखंड के गांव गोठड़ा की रहने वाली हैं। भाग्यश्री की माता सरला सैनी व पिता बनवारी लाल सैनी मानसिक विमंदितों के लिए काम करते हैं। सरला देवी को राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री सम्मानित कर चुके हैं।
- भाग्यश्री की बड़ी बहन डॉ. इंदु सैनी जयपुर के भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल में एचओडी (आहार विशेषज्ञ) हैं। वहीं, बड़े भाई सौरभ सैनी राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में सेवाएं दे रहे हैं।
- गांव गोठड़ा से शुरुआती शिक्षा पाने वालीं भाग्यश्री ने बीएससी, मास्टर्स इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री ले रखी हैं। इनके अलावा एनजीओ मैनेजमेंट, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, ब्रिटिश कोलंबिया व हावर्ड यूनिवर्सिटी से महिला एवं बाल अधिकारों में सर्टिफाइड हैं।
- भाग्यश्री सैनी ने भीलवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में सिलिकोसिस पर अध्ययन भी किया। कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म पर लिखती भी हैं। यूनिसेफ (वॉयस ऑफ़ यूथ), इंटरनेशनल यूथ जनरल, वूमेन वेब आदि पर लेख प्रकाशित हो चुके हैं। ये NCC में बेस्ट कैडेट व सीनियर अंडर ऑफिसर भी रही हैं।
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