Delhi Election Result 2025: कल था रोज डे आज हुआ 'लोटस' डे
Delhi Election Result 2025: यार फरवरी का महीना आ गया। इस महीने की फिज़ाओं में ही एक अलग महक होती है। शहरों, कस्बों और बाज़ारों में रौनक होती है। प्यार की महक बयार के साथ बहती है। इसी महीने के सातवीं तारीख से आशिकों की सप्तरात्री भी शुरू होती है। आशिकों का ये त्योहार सात दिन का होता है। जिसे पारंपरिक भाषा में वैलेंटाइन वीक कहा जाता है।
इसकी त्योहार की शुरुआत रोज डे से होती है और अंत वैलेंटाइंस डे पर। इन दो दिनों के बीच प्रपोज डे, चॉकलेट डे, टेडी डे, प्रॉमिस डे, हग डे और किस डे आते हैं। प्यार में डूबे युवा इस वीक में 'डे' के हिसाब से अपनी माशूक या माशूका को गिफ्ट देते हैं। पहले वो फूल देते हैं... वैसे भगवान भी ने ये फूल नामक चीज भी क्या खूब बनाई है। हर अच्छे काम की शुरुआत इसी के साथ होती। फिर चाहे पूजा करनी हो या नेता जी लोगों का स्वागत करना हो। इतना ही इस जब कोई नाराज हो तो उसे फूल देकर मना लो।

बीते दिन 7 तारीख को भारत समेत पूरी दुनिया ने रोज डे मनाया था। बाज़ारों में हर जगह गुलाब ही गुलाब दिखे। कुछ ने अपने माशूक के लिए खरीदा तो कुछ ने अपने लिए खरीदा। हमने भी सोचा लेकिन इन कमबख्त आशिकों ने इसे इतना महंगा करवा रखा है कि सोच पूरी न हो सकी। बहरहाल अब गुलाब से हम कमल पर आते हैं। जब ये खिलता है तो बड़ा प्यारा लगता है। इसकी खसियत है कि ये ज्ञान की देवी मां सरस्वती को चढ़ाया जाता है। इसकी दूसरी खासियत भी है। उसके बारे में भी बात कर लेते हैं। साल 1980 में कुछ लोगों को फूल बहुत पसंद आया। आप सोचेगें, कितना? इतना कि उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी का निशान ही फूल कमल को बना लिया। 1980 से शुरू हुए संघर्ष को जीत 2014 में मिली और फिर निरंतर बरकरार है। वैलेंटाइंस डे से ठीक दो दिन पहले देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव हुए। पोलिंग हुई, इस बार कमल की टक्कर झाड़ू से थी। इस टक्कर का रिजल्ट आया ठीक तीन दिन बाद यानी प्रपोज डे के दिन। और नतीजा क्या रहा, झाड़ू का सफाया हो गया। यूं भी कह सकते हैं कि दिल्लीवालों ने प्रपोज डे ना मना कर लोटस डे मना लिया है। 2025 के वैलेंटाइंस वीक के अवसर में आशिक भले ही 8 फरवरी को प्रपोज डे मना रहे हैं, लेकिन असल में वो लोटस डे हो गया है। आज के नतीजे देख ऐसा लग रहा है कि 1980 में लोटस को लेकर जो सपना देखा गया था। वो 2025 में पूरा हुआ।
आशिक सिर्फ किसी स्त्री से प्रेम करने वाला ही नहीं होता है। देश के आन बान शान की रक्षा करने वाला आशिक होता है। वैसे ही राजनीतिक पार्टियों के जूझारू कार्यकर्ता भी आशिक हैं। आशिकों के सप्तरात्रि भले ही अभी खत्म नहीं हों। लेकिन कुछ आशिकों का त्योहार पूरे हो गए हैं। जाते जाते ये भी बता देतें हैं कि फरवरी की शुरुआत से भले ही हर तरफ खुशनुमा माहौल रहे, लेकिन ये बड़ी जालिम भी। क्योंकि फरवरी दिल भी तोड़ती है। इसी पर एक शायर ने कहा कि कितने दिलों को तोड़ती है कम्बख़्त फरवरी, यूँ ही नहीं किसी ने इसके दिन घटाए हैं।












Click it and Unblock the Notifications