International Tea Day 2020: जानिए भारत की 7 पारंपरिक प्रसिद्ध 'चाय' के बारे में

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नई दिल्ली। जैसे ही 'चाय' का जिक्र होता है तो आपके जहन में सबसे पहले ताजगी भरी सुबह, गपशप, ब्रेक और ना जाने कितनी तस्वीरें उभरती हैं। चाय, दुनिया भर में सभी के जीवन में एक मजबूत स्थान रखती है। वास्तव में, हर कप चाय में एक कहानी होती है। यह पेय हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। सुबह की ऊर्जा बढ़ाने से लेकर लंबे थका देने वाले दिन के बाद आपको शांत करने तक... हम हर मिनट की स्थिति के लिए एक कप चाय का इंतजार करते हैं। चाय दुनिया का सबसे अधिक पीया जाने वाला पेय पदार्थ है। अब आप सोच रहे हैं कि अचानक हम चाय का जिक्र क्यों कर रहे हैं तो इसकी वजह बेहद खास है। विश्वभर में हर साल आज के दिन यानि 15 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस (International Tea Day) मनाया जाता है। भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया, केन्या, युगांडा जैसे चाय उत्पादक देश इस दिनों को बेहद की खास तरीके से मनाते हैं।
विश्व सामाजिक मंच पर कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और ट्रेड यूनियनों द्वारा डिज़ाइन किया गया, यह अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस पहली बार 2005 में नई दिल्ली में मनाया गया था। इसका उद्देश्य उत्पादकों और श्रमिकों पर चाय व्यापार के प्रभाव पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करना था। इस दिन को आम तौर पर चाय उत्पादक देशों में कई सेमिनारों, सम्मेलनों और कार्यक्रमों का आयोजन करके मनाया जाता है। भारत चाय के सबसे बड़े उत्पादकों और उपभोक्ताओं में से एक है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इस देश में चाय एक परंपरा है। जो हमारी खाद्य संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर क्षेत्र में चाय पीने के अपने अनूठे तरीके हैं। हम आपको बताते हैं भारत की 7 अलग तरह की चाय के बारे में...
बंगाली लेबू चा:
ये चाय बंगालियों के जीवन का एक अहम हिस्सा है। लेबू चा-बंगाल की खुद की मसालेदार नींबू वाली चाय है। यह मूल रूप से नींबू, काला नमक, अदरक पाउडर और चीनी मिलाकर बनाई गई एक काली चाय है।
कश्मीरी नून चाय:
इसे गुलाबी चाय भी कहा जाता है। नून चाय एक प्रामाणिक कश्मीरी चाय है जिसमें नमक मिलाया है। यहां, ग्रीन टी को पूरे मसालों (जैसे दालचीनी, इलायची), नट्स (बादाम, पिस्ता आदि), बेकिंग सोडा, दूध, नमक और चीनी के साथ पीया जाता है। जिससे पेय को एक अच्छा गुलाबी रंग मिलता है।
कश्मीरी कहवा:
प्रसिद्ध चाय कश्मीरी कहवा पूरे देश में व्यापक रूप से लोकप्रिय है। यह हल्की, सुगंधित होती है। यह आपको सर्दियों में काफी असरकार होती है।
पारसी चोई:
पारसी में चाय को चोई कहा जाता है। यह पारसी शैली की चाय, पुदीने की पत्तियों (अक्सर लेमनग्रास), अदरक और इलायची का एक सुगंधित मिश्रण है, जिसमें चाय की पत्ती भी शामिल की जाती है। आप इसे दूध मिलाकर या बिना दूध के भी पी सकते हैं।
मुंबई की कटिंग चाय:
कटिंग चाय का मतलब आधी कप या गिलास वाली चाय। मुंबई में यह काफी लोकप्रिय पेय है। यह मूल रूप से मसाला चाय है। मुंबई में कई मशहूर चाय वाले ब्रांड मौजूद हैं जो शानदार कटिंग चाय परोसते हैं।
गुजराती उकाडो:
उकाडो मूल रूप से नींबू, शहद, पुदीना, अदरक आदि पदार्थों से मिलकर बनाया गया एक काढ़ा है। यह एक तरह की हर्बल चाय है।
मंगलोरियन कसाई:
यह एक हर्बल चाय का विकल्प, मैंगलोर का यह गर्म पेय धानिया, जीरा, सौंफ, मेथी, मिश्री आदि के साथ बनाया जाने वाला काढ़ा है। कई लोग चीनी के बजाय इसे गुड़ डालकर पानी पसंद करते हैं।












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