Fact Check: क्या सच में द्रौपदी मुर्मू पहुंची थी RSS के मुख्यालय, आखिर क्यों प्रशांत भूषण ने मागी मांफी
नई दिल्ली, 07 जुलाई। सोशल मीडिया के इस दौर में कोई भी गलत जानकारी का शिकार हो सकता है। जिस तरह से तस्वीरों, वीडियो को एडिट करके शेयर किया जाता है उसे समझ पाना बहुत ही मुश्किल होता है। कई बार तो ऐसे लोग भी इस तरह की गलत जानकारियों का शिकार हो जाते हैं जो खुद काफी जानकार होते हैं और बड़े पद पर बैठे होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण भी इस तरह की गलत जानकारी का शिकार हो गए हैं और उन्हें अपनी गलत जानकारी के चलते सोशल मीडिया पर माफी तक मांगनी पड़ी है।

गलत तस्वीर शेयर करने के बाद माफी मांगी
दरअसल मंगलवार को प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया पर एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट के साथ उन्होंने एक तस्वीर को भी शेयर किया था, जिसमे दावा किया गया है कि नागपुर स्थित आरएसएस के मुख्यालय में संघ प्रमुख मोहन भावगत के साथ राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू भारत माता की तस्वीर के सामने हाथ जोड़े खड़ी हैं। लेकिन बाद में यह बात सामने आई कि यह वीडियो पूरी तरह से गलत है। जिसके बाद प्रशांत भूषण ने अपने ट्वीट पर माफी मांगी है।

तस्वीर पर खड़े हुए सवाल
इस तस्वीर को प्रशांत भूषण ने ट्वीट करके लिखा था क्या इस बात में अब कोई संदेह है कि द्रौपदी मुर्मू रबर स्टांप की तरह काम करेंगी और वह स्वतंत्र तौर पर काम नहीं कर पाएंगी। लेकिन जब इस तस्वीर की पड़ताल की गई तो पाया गया कि दो अलग-अलग तस्वीरों को काटकर एक में जोड़ा गया और दिखाने की कोशिश की गई कि द्रौपदी मुर्मू संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ खड़ी हैं।

दो तस्वीरों को जोड़कर बनाया गया
जिन दो तस्वीरों को जोड़ा गया है उसमे से एक तस्वीर आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का है, जो मार्च माह में क्लिक की गई थी। जबकि द्रौपदी मुर्मू की तस्वीर दो साल पहले की है, जब वह झारखंड में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गई थीं। इस कार्यक्रम में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी थे। सरकार में एक साल पूरे होने के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमे द्रौपदी मुर्मू भी हिस्सा लेने पहुंची थीं। इन्ही दो अलग-अलग तस्वीरों को एक में मिलाकर दिखाया गया है। बता दें कि द्रौपदी मुर्मू 2015-2019 के बीच झारखंड की राज्यपाल थीं।

लोगों ने साधा निशाना
ना सिर्फ प्रशांत भूषण बल्कि कई लोग इस गलत तस्वीर को सोशल मीडिया पर सच मान बैठे और इस तस्वीर को बड़ी संख्या में शेयर करने लगे। लोगों ने तस्वीर को शेयर करते हुए द्रौपदी मुर्मू के नामांकन पर सवाल खड़ा किया। एक यूजर ने लिखा कि इसमे किसी भी तरह का संदेह नहीं है कि आखिर शासन कहां से चलता है। हम सब आरएसएस के मुख्यालय के निर्देश से चलते हैं।

पहले भी गलत जानकारी साझा कर चुके हैं भूषण
बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि जब सोशल मीडिया पर गलत जानकारी साझा करने की वजह से प्रशांत भूषण विवादों में आए हैं। पिछले साल भी सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण विवादों के घेरे में आए थे जब उन्होंने कोरोना वैक्सीन की गुणवत्ता और इसकी असर को लेकर जानकारी साझा की थी। जिसे ट्विटर ने भ्रामक बताया था। प्रशांत भूषण ने ट्वीट करके लिखा था कि वैक्सीन के चलते युवा आबादी की ज्यादा मौत हो रही है।

Fact Check
दावा
तस्वीरों की पड़ताल की गई
नतीजा
पड़ताल के बाद पाया गया कि सोशल मीडिया पर किया गया दावा गलत है।












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