खालिस्तानियों को लेकर चेतावनी भरा पत्र क्या विदेश मंत्रालय ने जारी किया है, जानें सच्चाई
खालिस्तानियों को लेकर चेतावनी भरा पत्र क्या विदेश मंत्रालय ने जारी किया है, जानें सच्चाई
नई दिल्ली, 14 दिसंबर। सोशल मीडिया इन दिनों देश के विदेश मंत्रालय के नाम से एक पत्र सर्कुलेट हो रहा है। विदेश मंत्रालय की ओर से चेतावनी को लेकर सोशल मीडिया पर जो ये लेटर शेयर किया गया है, इसमें कहा गया है कि MEA ने भारत विरोधी गतिविधियों और लोगों के आसपास खालिस्तान चरमपंथियों के दुष्प्रचार के खिलाफ चेतावनी दी है। भारत विरोधी गतिविधियों और दुनिया भर में खालिस्तानी चरमपंथियों के प्रचार के खिलाफ विदेश मंत्रालय के चेतावनी भरे पत्र की आखिर सच्चाई क्या है?

पाकिस्तानी की गहरी संलिप्तता का संदेह है
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस लेटर को लेकर अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि ये विदेश मंत्रालय द्वारा जारी नहीं किया गया है। वहीं सुरक्षा एजेंसियों को इस पत्र को तैयार करने में पाकिस्तानी की गहरी संलिप्तता का संदेह है क्योंकि पाकिस्तान खालिस्तान समर्थक तत्वों के माध्यम से किसानों के आंदोलन के दौरान अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा था।
पत्र कभी जारी नहीं किया गया
मंगलवार को अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारत विरोधी गतिविधियों और दुनिया भर में खालिस्तानी चरमपंथियों के प्रचार के खिलाफ विदेश मंत्रालय (एमईए) द्वारा चेतावनी के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जा रहा एक पत्र नकली है। अधिकारियों ने कहा कि कथित तौर पर 8 नवंबर को जारी किया गया और कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया जा रहा पत्र कभी जारी नहीं किया गया था। कथित पत्र में सिख चरमपंथियों द्वारा उत्पन्न खतरे का मुकाबला करने के उपायों के बारे में बात की गई थी।
एक अलर्ट जारी किया गया था
पिछले महीने की रिपोर्टों में कहा गया था कि एक खुफिया इनपुट के बाद एक अलर्ट जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) संसद भवन का घेराव कर सकता है और उस पर खालिस्तान का झंडा फहरा सकता है। खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली पुलिस सहित अधिकारियों को सतर्क रहने और संसद के आसपास व्यापक सुरक्षा व्यवस्था करने को कहा है।
गुरपतवंत ने वीडियो जारी कर की है ये अपील
यह लेटर तब सामने आया जब सिख फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने यू ट्यूब पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें किसानों से संसद का घेराव करने और संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान खालिस्तानी झंडा फहराने की अपील की गई। पन्नू ने वीडियो में कहा है कि संसद पर खालिस्तान का झंडा फहराने वाले को 125,000 डॉलर का इनाम दिया जाएगा।
क्या खालिस्तान को पंजाब से अलग किया जाना चाहिए?
अक्टूबर में, अमेरिका स्थित सिख फॉर जस्टिस ने यह तय करने के लिए एक तथाकथित जनमत संग्रह करने के लिए लोगों को बुलाया। जिसमें पूछा गया कि क्या खालिस्तान को पंजाब से अलग किया जाना चाहिए। एसएफजे ने वेस्टमिंस्टर में हुए जनमत संग्रह में 18 साल से ऊपर के सभी सिखों को वोट देने के लिए बुलाया गया था। लंदन स्थित राजनयिकों ने कहा कि तीन ज्ञात खालिस्तान आंदोलन समर्थकों को छोड़कर किसी भी गुरुद्वारे ने आयोजकों को एक मंच की अनुमति नहीं दी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जो लोग मतदान करने आए थे वे खालिस्तानियों के एक चुनिंदा समूह थे और जिनका कोई विशेष झुकाव नहीं था और उन्हें किसी न किसी बहाने मतदान केंद्रों पर ले जाया गया। वहीं 15 नवंबर को ब्रिटेन की पुलिस ने हाउंस्लो स्थित सिख फॉर जस्टिस के दफ्तर पर छापा मारा था। मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने एसएफजे द्वारा आयोजित तथाकथित जनमत संग्रह से संबंधित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया था।

Fact Check
दावा
MEA warning letter over Khalistan
नतीजा
MEA warning letter over Khalistan is fake, say officials












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