Gambia cough syrup:किडनी की बीमारी से बच्चों की मौत या भारतीय कफ सिरप जिम्मेदार ? Fact Check

Gambia cough syrup विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत की एक दवा कंपनी की चार कफ सिरप के खिलाफ बुधवार को अलर्ट जारी किया था। डब्ल्यूएचओ ने आशंका जताई कि गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत के तार इन्हीं कफ सिरप से जुड़े हो सकते हैं। तथ्य यह है कि गाम्बिया में पिछले कुछ महीनों में किडनी की बीमारी (acute kidney injury ) की वजह कई बच्चों की असामयिक मौत हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन दवाओं पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं लगाया है, सिर्फ एक एडवाइजरी जारी की है। लेकिन, जब वनइंडिया ने इसकी पुख्ता पड़ताल की तो पूरी कहानी बनाई हुई लगती है और लगता है कि गाम्बिया की सरकार ने अपनी नाकामी का ठीकरा भारतीय कंपनी पर फोड़ने की कोशिश की है।

डाईएथिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल खतरनाक है

डाईएथिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल खतरनाक है

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि इन दवाओं (कफ सिरप) में डाईएथिलीन ग्लाइकोल ( Diethylene glycol) नाम का एक अव्यव होता है, जो कि टॉक्सिक है। जिससे बच्चों की मौत की आशंका जताई जा रही है। डाईएथिलीन ग्लाइकोल वास्तव में खतरनाक है और पहले भी इसे किडनी की बीमारियों का कारण माना गया है। लेकिन, तथ्य यह भी है कि डाईएथिलीन ग्लाइकोल के बारे में स्वास्थ्य जगत में ज्यादा ठोस जानकारी नहीं मिलती और साथ ही साथ दवा बनाने में इसका इस्तेमाल भी खूब होता है। साइंसडायरेक्ट डॉट कॉम के मुताबिक, 'यह अपेक्षाकृत कम घुलनशील पदार्थों को बहुत आसानी से घोल सकता है। इसका मानव के लिए बनने वाली दवा में भी सामान्य तौर पर इस्तेमाल होता है, जैसे कि एसिटामिनोफेन और सल्फेनालेमाइड, या तो जानबूझकर या गलती से मानव तक जहर पहुंच जाता है, जिसमें कई घातक होते हैं।'

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    अमेरिका समेत दूसरे देशों में भी खूब इस्तेमाल हो रहा है

    अमेरिका समेत दूसरे देशों में भी खूब इस्तेमाल हो रहा है

    तथ्य यह भी है कि ये भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका समेत पूरे विश्व में भी धड़ल्ले से उपलब्ध है। यही नहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भले ही भारतीय कंपनी की चार दवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है, लेकिन इसकी वेबसाइट पर आजतक इस डाईएथिलीन ग्लाइकोल को लेकर कोई एडवाइजरी नहीं जारी नहीं की गयी है। जबकि, इस वैश्विक स्वास्थ्य संगठन का काम ही यही है कि वह ऐसे खतरनाक अव्यवों की रोकथाम के लिए उचित कदम उठाए। हालांकि, संगठन ने इन दवाओं के खिलाफ अभी सिर्फ इन दवाओं के इस्तेमाल के खिलाफ अलर्ट जारी किया है कोई पाबंदी नहीं लगाई है।

    गाम्बिया में किडनी रोगियों की भरमार रहती है

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    अब इस पूरे मामले को जिस तरह से दुनिया में उछालने की कोशिश की गई है, उसके पूरे बैकग्राउंड को समझने की कोशिश जरूरी है। किडनी की बीमारी पूरी दुनिया में समस्या बनी हुई है। जहां तक पश्चिम अफ्रीका के गाम्बिया की बात है, तो इस देश में किडनी रोगियों की बड़ी तादाद है। 2022 के अगस्त से जब गाम्बिया से बच्चों की मौत की खबरें आनी शुरू हुई थी, तभी एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट भी आई थी। उसके मुताबिक, 'पश्चिम अफ्रीका में किडनी की बीमारी अक्सर नजर आती है, लेकिन विशिष्ट सुविधाओं की कमी के चलते जांच और इलाज के विकल्प बहुत ही कम हैं।' इसी रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी गई कि गाम्बिया के बच्चों में एडिमा और प्रोटीनुरिया की शिकायत बहुत ज्यादा मिलती है और ये दोनों ही किडनी रोग से जुड़े हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन भी दूषित पानी की ओर कर चुका है इशारा

    विश्व स्वास्थ्य संगठन भी दूषित पानी की ओर कर चुका है इशारा

    खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 25 सितंबर को एक साप्ताहिक बुलेटिन जारी किया था। इसके मुताबिक बच्चों के 62 स्टूल सैंपल में से 61% सैंपल (जिन बच्चों के क्लिनिकल टेस्ट की रिपोर्ट acute kidney injury के जैसे थे) Escherichia Coli (E. coli.) पॉजिटिव पाए गए। ऐसे बच्चों के घरों में पानी की गुणवत्ता की भी जांच की गई और उसमें भी E.coli की मौजूदगी मिली। लेकिन, पारा या सीसा समेत कोई हेवी मेटल नहीं मिले। 2018 में भी जितने क्लस्टर में पानी के सर्वे किए गए, उन सब में E.coli की मौजूदगी थी। दरअसल, E.coli एक बैक्टीरिया है, जो सामान्य तौर पर हानिकारक नहीं है और ज्यादतर लोगों के शरीर में होता है। लेकिन, इसके कुछ स्ट्रेन किडनी से जुड़ी बीमारी के कारण हो सकते हैं; और यह दूषित पानी या भोजन की वजह से हो सकता है।

    E.coli बैक्टीरिया भी हो सकती है वजह

    E.coli बैक्टीरिया भी हो सकती है वजह

    इस तरह की किडनी की बीमारी की शुरुआती लक्षणों में डायरिया, कफ, उल्टियां आदि दिखाई देते हैं। जब गाम्बिया के बच्चों को किडनी की इस बीमारी ने घेरा होगा तो पहले उनके माता-पिता ने पहले उन्हें अपने पास के स्वास्थ्य केंद्रों या डॉक्टरों को दिखाया होगा। इसके बाद उन्हें भारतीय कंपनी की कफ सिरप लेने की सलाह दी गई होगी, जिससे उन्हें कोई आराम नहीं मिला। जब बच्चों की मौत हुई तो गाम्बिया सरकार हरकत में आई और जांच में जुटी। विदेशी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक गाम्बिया में भारी बारिश के कारण Escherichia Coli बैक्टीरिया भी बहुत तेजी से फैला है। रॉयटर्स ने कहा है, 'E.coli बैक्टीरिया भी एक संभावित वजह हो सकती है, क्योंकि हाल के कुछ हफ्तों में भारी बारिश के चलते गाम्बिया समेत पश्चिम अफ्रीका के ज्यादातर हिस्सों में बाढ़ आई है।'

    दूषित पानी ही लगता है जिम्मेदार

    दूषित पानी ही लगता है जिम्मेदार

    इस बीच द चाइल्ड प्रोटेक्शन एलायंस नाम के एक एनजीओ का बयान है, जिसने कहा कि बच्चों की मौत E.coli की वजह से हुई, लेकिन इसमें दवा का भी असर है। हालांकि, उसने अपने दावों के समर्थन में कोई पुख्ता साक्ष्य पेश नहीं किए और सिर्फ घटनाक्रम को जोड़ने का काम किया। लेकिन, जब पैरासिटामोल या कफ सिरप पर बवाल शुरू हुआ तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारी बोलेने लगे कि साक्ष्य पैरासिटामोल की तरफ नहीं, बल्कि दूषित पानी जैसे संक्रमण करने वाली चीजों की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन इसपर भी जोर दिया कि कई अनुत्तरित प्रश्न हैं।

    गाम्बिया सरकार ने अपनी गलती दबाने की कोशिश की

    गाम्बिया सरकार ने अपनी गलती दबाने की कोशिश की

    मतलब, गाम्बिया में बच्चों की मौत का कारण पैरासिटामोल या कफ सिरप नहीं, बल्कि दूषित पानी है। लेकिन, गाम्बिया सरकार ने अपनी खराब स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुलने के डर से सारा दोष पैरासिटामोल या कफ सिरप की ओर मोड़ दिया। जबकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन की साप्ताहिक बुलिट में साफ बताया गया था कि उनके पास किडनी की बीमारी के इलाज के लिए उचित इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव है। इसके मुताबिक 'खासकर विकासशील देशों के बच्चों में एक्यूट किडनी इंजरी उच्च मृत्यु दर से जुड़ी होती है। गाम्बिया समेत ज्यादातर देश के पास किडनी की बीमारी के लिए पर्याप्त मानव या बाकी आवश्यक संसाधनों का अभाव है, जिसमें कि डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। '(कुछ तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

    गाम्बिया की अपनी एजेंसी ने भी खोली पोल

    गाम्बिया की अपनी एजेंसी ने भी खोली पोल

    वहीं गाम्बिया की मेडिकल कंट्रोल एजेंसी ने भी कहा था कि 'पैरासिटामोल सिरप पर सामान्य प्रतिबंध लगाने के लिए डेटा अपर्याप्त था, बच्चों में बुखार के इलाज के लिए दर्द निवारक अक्सर इस्तेमाल किया जाता है।' मतलब, खुद गाम्बिया सरकार की एक आधिकारिक संस्था ने माना है कि दवा के इतने ज्यादा सैंपल नहीं हैं कि इसके आधार पर वह कार्रवाई कर सकें।

    अंतिम निष्कर्ष:

    1) विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी गाम्बिया की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था और दूषित पानी के कारण पैदा हो रहे बैक्टरिया पर सवाल उठाया था। पहले कुछ कहा गया और बाद निष्कर्ष कुछ और निकाला गया।

    2) गाम्बिया सरकार को जब अपना पोल खुलने का डर हुआ तो भारतीय दवा पर दोष थोप दिया गया। जबकि, उसके अपने मेडिकल कंट्रोल एजेंसी ने कहा था, दवाओं के खिलाफ कार्रवाई लायक पर्याप्त सैंपल नहीं हैं।

    3) जब गाम्बिया ने इसका आयात किया तो उसकी जांच तो जरूर की होगी। गाम्बिया में यह दवा पहले भी रही होगी तो उसने पहले ही कार्रवाई क्यों नहीं की? अगर भ्रष्टाचार का भी मामला है, तो वह अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

    विवाद की असल वजह क्या हो सकती है ?

    गाम्बिया सरकार बाढ़ के प्रबंधन और स्वच्छ पानी की आपूर्ति में नाकाम रही। स्वास्थ्य सेवाओं को ठीक करने के लिए कुछ नहीं कर सकी। शायद इसलिए सोचा की भारतीय दवाओं पर ठीकरा फोड़कर अपना चेहरा बचाया जा सकता है।

    Fact Check

    दावा

    भारतीय कफ सिरप से बच्चों की मौत

    नतीजा

    दावा पूरी तरह सत्य नहीं है

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